लाइव सिटीज, पटना: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि कृषि शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ने की जरूरत है। युवाओं को शिक्षा के साथ ऐसा कौशल और अवसर उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें और रोजगार तलाशने के साथ-साथ खुद रोजगार देने वाले भी बनें। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा, आधुनिक तकनीक, शोध और नवाचार के माध्यम से बिहार को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है।
शिक्षा मंत्री शुक्रवार को समस्तीपुर के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विद्यापति सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। नीति आयोग और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘ग्रीन माइंड्स फॉर ग्रीन नेशन : एग्री एजुकेशन एंड स्किलिंग@2047’ रखा गया है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, कृषि विशेषज्ञ और संबंधित क्षेत्र के जानकार शामिल हुए।
‘लर्न टू अर्न’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा शिक्षा विभाग
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि शिक्षा विभाग ‘रिफॉर्म से परफॉर्म’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ‘लर्न टू अर्न’ के संकल्प के साथ शिक्षा व्यवस्था में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को ज्ञान के साथ कौशल दे और उन्हें रोजगार तथा स्वरोजगार के लिए तैयार करे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक और नवाचार तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भी इन बदलावों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। कृषि शिक्षा में आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध और नवाचार को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में रोजगार और व्यवसाय की बड़ी संभावनाएं
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार के साथ-साथ व्यवसाय शुरू करने की भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों और शोध के माध्यम से खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों में बदलाव लाया जा सकता है। युवाओं को नई कृषि तकनीक, कृषि प्रसंस्करण, उत्पादन, प्रबंधन और बाजार से जुड़ी जानकारी देकर उन्हें इस क्षेत्र में नए उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में तैयार होने वाले नए उत्पादों और तकनीकों को बाजार से जोड़ने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
‘शोध खेत तक और नवाचार बाजार तक’ पहुंचाने पर जोर
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में शोध और नवाचार तभी ज्यादा प्रभावी होंगे, जब उनका लाभ जमीन पर दिखाई दे। उन्होंने ‘शोध को खेत तक और नवाचार को बाजार तक’ पहुंचाने की आवश्यकता बताई। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों, सरकार, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध को किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की आवश्यकता है। वहीं नई तकनीकों और शोध से तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि शिक्षा की अहम भूमिका
शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। कृषि को आधुनिक, तकनीक आधारित और अधिक रोजगारपरक बनाने के लिए शिक्षा और कौशल विकास को साथ लेकर चलना होगा।
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, कौशल और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए। इससे ग्रामीण और कृषि पृष्ठभूमि के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही नए रोजगार और व्यवसाय के अवसर मिल सकते हैं।
कुलपतियों और विशेषज्ञों ने भी रखे विचार
कार्यशाला में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय, नीति आयोग के सदस्य केबी राजू सहित विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान कृषि शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने, युवाओं के कौशल विकास और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य कृषि शिक्षा और कौशल विकास को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने के साथ-साथ युवाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसरों से परिचित कराना भी है।
रेडियो-टीवी स्टेशन पर भी साझा किए विचार
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के रेडियो स्टेशन और टीवी पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कृषि शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
इसके बाद शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में शोध आधारित कृषि उत्पादों, आधुनिक कृषि तकनीकों और विभिन्न नवाचारों को प्रदर्शित किया गया था। मंत्री ने प्रदर्शनी में मौजूद उत्पादों और तकनीकों के बारे में जानकारी ली तथा शोधकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की।
इस दौरान कृषि शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने, शोध को किसानों तक पहुंचाने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।
