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छात्रों पर फायरिंग को लेकर तेजस्वी यादव का सम्राट सरकार पर हमला, पूछे ये 15 सवाल?

लाइव सिटीज, पटना: बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान सीवान में हुई फायरिंग का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर सम्राट चौधरी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार से फायरिंग से लेकर पुलिस की कार्रवाई, अधिकारियों की जिम्मेदारी और इस्तेमाल की गई गोलियों का हिसाब तक मांगा है।

तेजस्वी यादव का आरोप है कि अपने अधिकारों और मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोली चलाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया और इतनी बड़ी घटना के बाद अब तक बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

सीवान में छात्रों पर AK-47 से हुई फायरिंग को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार से 15 सवाल पूछे—

छात्रों पर गोली चलाने वाले सिपाही के पास AK-47 आई कैसे? यह हथियार किस यूनिट या शस्त्रागार से जारी हुआ?

AK-47 जारी करने का आदेश किसने दिया? इसकी पूरी कमांड-चेन क्या थी?

आरोपी सिपाही किस यूनिट में तैनात था? क्या वह जिला पुलिस, SP सुरक्षा या किसी विशेष इकाई से जुड़ा था?

क्या वह आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन से जुड़ा था? अगर विशेष बल का जवान था तो उसकी वास्तविक ड्यूटी क्या थी?

क्या इससे पहले किसी छात्र प्रदर्शन में AK-47 का इस्तेमाल हुआ है?

क्या AK-47 लेकर भीड़ नियंत्रण की अनुमति थी? Crowd Management के SOP का पालन क्यों नहीं हुआ?

फायरिंग का आदेश किसने दिया? जिले के पुलिस अधीक्षक पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कितनी गोलियां चलीं और कितने राउंड जारी किए गए थे? कारतूसों का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

इस्तेमाल किए गए हथियार का बैलिस्टिक और फॉरेंसिक परीक्षण हुआ या नहीं?

क्या बॉडी कैमरा या वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है? फायरिंग से पहले और बाद की पूरी गतिविधि सामने क्यों नहीं लाई जा रही?

अगर AK-47 गलत ड्यूटी पर पहुंची तो सिर्फ सिपाही को निलंबित करना पर्याप्त है या हथियार जारी करने वाले अधिकारी की भी जवाबदेही तय होगी?

क्या पूरी कमांड-चेन की जांच होगी? जांच केवल गोली चलाने वाले जवान तक सीमित क्यों रहे?

AK-47 जैसे आधुनिक हथियार के इस्तेमाल में प्रशिक्षण, आदेश और जवाबदेही जरूरी है। फिर वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं हुई?

इस पूरे मामले में गृह विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी क्या है? हथियारों की तैनाती और कानून-व्यवस्था की निगरानी कैसे हुई?

क्या सिर्फ विभागीय जांच पर्याप्त है या स्वतंत्र जांच में हथियार आवंटन से लेकर पूरी कमांड-चेन की भी पड़ताल होगी?

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