HomeBiharगयाजी में 48 विदेशी श्रद्धालुओं ने अपनाया सनातन धर्म, पितरों का पिंडदान

गयाजी में 48 विदेशी श्रद्धालुओं ने अपनाया सनातन धर्म, पितरों का पिंडदान

लाइव सिटीज, गया: गयाजी में पितृपक्ष मेले का आज आठवां दिन है, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। हाल ही में शुक्रवार सुबह, जर्मनी, स्पेन, इटली, डच, और पुर्तगाल से आए 48 विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के किनारे अपने पूर्वजों का पिंडदान किया। ये सभी मेहमान ईसाई और इस्लाम धर्म को छोड़कर सनातन धर्म को स्वीकार चुके हैं। फल्गु नदी के तट पर उन्होंने अपने पितरों के उद्धार के लिए पिंडदान किया, जो एक धार्मिक कर्म है।

तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आस्था

सनातन धर्म प्रचारक लोकनाथ गौड़दास के अनुसार, ये 48 विदेशी श्रद्धालु तीन अलग-अलग ग्रुप में गयाजी पहुंचे हैं। पिंडदान के बाद उनका अगला कदम विष्णुपद मंदिर में पूजा और दर्शन करना था। इसके लिए उन्होंने ढाई साल तक कठिन नियमों का पालन किया, जिसका सख्ती से पालन करते हुए इजाजत मिली। जब उन्होंने पूरी निष्ठा से इस धर्म को अपनाया, तब उन्हें गयाजी आने का मौका मिला।

दुखों से निकले सनातन की ओर

इन श्रद्धालुओं में कई ऐसे लोग हैं, जो जीवन की बड़ी त्रासदियों से परेशान थे। क्रिस्टीना ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी सहेली एक हादसे में नदी में डूब गईं, जिसे वे नहीं बचा सकीं। इस दुखद घटना के बाद वे बेहद अशांत हो गईं। वहीं, मरीना ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को खो दिया था और इसके बाद सनातन के मार्ग पर चलने का फैसला किया। इन सभी ने अपने और अपने प्रियजनों की आत्मा की शांति के लिए गयाजी को चुना।

विदेशों में बढ़ रहा सनातन धर्म

लोकनाथ गौड़दास ने बताया कि आज विदेशों में सनातन धर्म का प्रचार भारत की तुलना में 10 गुना तेजी से हो रहा है। अगले महीने घाना से भी एक दल आ रहा है, जिसमें वहां के प्रधानमंत्री के पीए भी शामिल हैं, जिन्होंने गंगाजल से अपने घर का शुद्धिकरण कर सनातन धर्म अपनाया। शास्त्रों में विश्वास को सबसे बड़ा आधार माना गया है, और गयाजी का स्थान पितरों के उद्धार के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यही कारण है कि विदेशी श्रद्धालु यहां खींचे चले आ रहे हैं।

धर्म परिवर्तन पर विचार

विष्णुपद मंदिर में पिंडदान के लिए अन्य धर्म के अनुयायियों के प्रवेश पर रोक के सवाल पर गौड़दास ने कहा कि एक तरफ हिंदू धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जब दूसरे धर्म के लोग सनातन अपनाते हैं, तो उन्हें प्रवेश नहीं देना उचित नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंदिर प्रबंधन समिति इस विषय पर विचार करेगी और संतुलन बनाए रखेगी।
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