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फुलवारी में बाढ़ की बदहाली पर मीसा भारती का फूटा गुस्सा, मंत्री रामकृपाल यादव के सामने अधिकारियों को जमकर सुनाया

लाइव सिटीज, पटना: पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र की आरजेडी सांसद मीसा भारती ने अपने क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति और प्रभावित लोगों को मिल रही सरकारी सुविधाओं को लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। बाढ़ प्रभावित इलाकों के निरीक्षण के दौरान उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव की मौजूदगी में अधिकारियों से जवाब मांगा और राहत व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

दानापुर की छह और मनेर की छह पंचायतें बाढ़ से प्रभावित

मीसा भारती ने कहा कि दानापुर की छह पंचायतें और मनेर की छह पंचायतें हर साल बाढ़ की चपेट में आती हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है, इसके बावजूद स्थायी और पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है।

उन्होंने कहा कि दानापुर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां गंगा का पानी दोनों तरफ से पहुंचता है। ऐसे में गंगा किनारे और दियारा क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को बाढ़ के दौरान आवागमन, भोजन, पीने के पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

फुलवारी में सरकारी नाव नहीं होने पर उठाए सवाल

मीसा भारती ने अधिकारियों से सबसे बड़ा सवाल फुलवारी इलाके में नावों की व्यवस्था को लेकर किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बीच लोगों को आने-जाने के लिए नाव की जरूरत है, लेकिन फुलवारी में बाढ़ पीड़ितों के लिए एक भी सरकारी नाव उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इलाके में हर साल बाढ़ आती है और प्रशासन को पहले से इसकी जानकारी रहती है, तो फिर समय रहते सरकारी नावों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

निजी नावों के भरोसे बाढ़ पीड़ित

सांसद ने कहा कि सरकारी नाव नहीं होने के कारण स्थानीय लोग निजी नावों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। बाढ़ के समय गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सामने पहले ही कई तरह की परेशानियां होती हैं, ऐसे में निजी नावों पर निर्भरता उनके लिए अतिरिक्त मुश्किल पैदा करती है।

मीसा भारती ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान प्रशासन की पहली जिम्मेदारी प्रभावित लोगों तक राहत और जरूरी संसाधन पहुंचाना है। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से व्यवस्था में तत्काल सुधार करने को कहा।

हर साल बाढ़, फिर भी तैयारी पर सवाल

मीसा भारती ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन इलाकों में हर साल बाढ़ आती है, वहां प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए। दियारा और गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों को बाढ़ के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को पहले से रहती है।

उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री, नाव और आवागमन समेत जरूरी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े।

मंत्री रामकृपाल यादव के सामने अधिकारियों को घेरा

मीसा भारती ने ये सवाल बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव की मौजूदगी में अधिकारियों के सामने उठाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि केवल कागजों पर राहत व्यवस्था होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका लाभ जमीन पर बाढ़ से जूझ रहे लोगों तक पहुंचना चाहिए।

सांसद ने अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को समझने और जरूरत के मुताबिक तत्काल कदम उठाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बाढ़ के बीच लोगों को सरकारी मदद के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि प्रशासन को खुद सक्रिय होकर राहत पहुंचानी चाहिए।

बाढ़ पीड़ितों की परेशानी को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग

मीसा भारती ने बाढ़ प्रभावित दानापुर, मनेर और आसपास के इलाकों में राहत व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की। उन्होंने अधिकारियों को यह भी संदेश दिया कि बाढ़ के दौरान लापरवाही या संसाधनों की कमी का खामियाजा आम लोगों को नहीं भुगतना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गंगा किनारे और दियारा क्षेत्र में रहने वाले परिवार हर साल बाढ़ का सामना करते हैं। इसलिए इन इलाकों के लिए सिर्फ तत्काल राहत नहीं, बल्कि स्थायी और बेहतर बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत है।

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