लाइव सिटीज, पटना: बिहार में सरकारी स्कूलों की सुविधाएं बेहतर बनाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 2,021 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने यह मांग रखी। इस राशि का उद्देश्य राज्य में 1,520 नए प्राथमिक विद्यालयों के निर्माण समेत शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार करना है।
यह पहल इसलिए अहम है, क्योंकि बिहार में सरकारी विद्यालयों में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। सरकार का जोर स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने, डिजिटल शिक्षा का विस्तार करने और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर है।
शिक्षा मंत्री के अनुसार, अगले वित्त वर्ष से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य करने की योजना है। इसका मकसद विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक का ज्ञान देना और भविष्य की पढ़ाई तथा रोजगार के लिए तैयार करना है।
3. स्कूलों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था
स्कूलों में स्मार्ट क्लास उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे शिक्षक डिजिटल सामग्री और आधुनिक तकनीक की मदद से पढ़ाई करा सकें। इससे विद्यार्थियों को विषयों को समझने के नए अवसर मिल सकते हैं।
पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने की। बैठक में स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों के बुनियादी ढांचे, शिक्षा की गुणवत्ता और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा हुई।
बिहार सरकार के मुताबिक, राज्य में लगभग 80 प्रतिशत विद्यालय सरकारी हैं और करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में नामांकित हैं। इसलिए सरकारी स्कूलों में बेहतर भवन, जरूरी सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है
