लाइव सिटीज, पटना: बिहार में बाढ़ से हुई तबाही और राहत-बचाव कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समीक्षा बैठक की. बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर जल्द रिपोर्ट देने को कहा. वहीं, बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच 12 अक्टूबर को अनुग्रहिक राहत राशि बांटने की जानकारी दी गई.
लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में हुई बैठक में बाढ़ की स्थिति, प्रभावित इलाकों और अब तक चलाए गए राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास से जुड़े कामों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए.
बैठक में जल संसाधन विभाग की ओर से बताया गया कि बिहार में इस साल बाढ़ की स्थिति दो चरणों में बनी. पहले चरण में गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन नदियों में कई स्थानों पर पहले के रिकॉर्ड से अधिक जलस्तर दर्ज किया गया. दूसरे चरण में भारी बारिश के चलते गंडक नदी के चार स्थानों पर उच्चतम जलस्तर दर्ज हुआ.बाढ़ के दौरान पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण जिलों में छह स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचा. समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बाढ़ के दौरान किए गए राहत और बचाव कार्यों की भी जानकारी मुख्यमंत्री को दी.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि गंगा, गंडक और सोन नदियों में इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक पानी आया, जिससे बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई. उन्होंने नदी तल में जमा होने वाली गाद को भी बाढ़ की प्रमुख वजहों में शामिल किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने गाद प्रबंधन को लेकर नीति बनाई है.
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और जरूरी विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए नुकसान की रिपोर्ट जल्द तैयार होनी चाहिए. आपदा प्रबंधन विभाग को सभी संबंधित विभागों से क्षति और पुनर्स्थापन पर आने वाले खर्च का आकलन कराकर रिपोर्ट देने को कहा गया.
