लाइव सिटीज, पटना: बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 को लेकर अब सरकार के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।चिराग पासवान ने कहा है कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की नई नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले इससे जुड़े सभी पक्षों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ-साथ अतिथि शिक्षकों, विश्वविद्यालयों और विषय विशेषज्ञों की राय भी ली जानी जरूरी है।
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया है कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि वर्षों से बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के अनुभव और भविष्य को सुरक्षित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने योग्य अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर देने की वकालत की है। चिराग ने सरकार से इस संवेदनशील विषय पर सकारात्मक और छात्रों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कही है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र के माध्यम से बिहार सरकार के सामने 6 मुख्य मांगें रखी हैं, जो इस प्रकार हैं:
- सहायक प्राध्यापक बहाली में यूजीसी रेगुलेशन 2018, टेबल 3A को पूरी तरह लागू किया जाए.
- असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष की जाए.
- बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बहाली को संविदा के बजाय स्थायी और नियमित किया जाए.
- इस बहाली प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति (झारखंड/बिहार के स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता) को सख्ती से लागू किया जाए.
- बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता का हनन तुरंत बंद किया जाए.
- नियमित नियुक्ति से पहले कई वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों का सेवा सामंजन 65 वर्ष की आयु तक किया जाए
