लाइव सिटीज, पटना: बिहार में गंगा के जलस्तर में कुछ जगहों पर कमी दर्ज होने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई स्थानों पर गंगा समेत दूसरी प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सरकारी रियल-टाइम आंकड़ों में भी कई नदियों का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है।
पटना से लेकर भागलपुर, मुंगेर और आसपास के इलाकों तक गंगा के किनारे बसे निचले क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इससे पहले गंगा का पानी कई घाटों और निचले रास्तों तक पहुंच गया था। पटना के दीघा और गांधी घाट समेत कई स्थानों पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया था।
जलस्तर में मामूली गिरावट को बाढ़ की स्थिति सामान्य होने का संकेत नहीं माना जा सकता। नदी का पानी अभी भी कई जगह खतरे की सीमा के ऊपर है। इसके अलावा गंगा के साथ-साथ गंडक, कोसी, घाघरा और पुनपुन जैसी नदियों में भी कई स्थानों पर जलस्तर सामान्य से काफी ऊपर है। 9 सितंबर के सरकारी आंकड़ों में गंडक, कोसी, घाघरा और पुनपुन के कुछ माप केंद्रों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज हुआ है।
जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन ने निगरानी कम नहीं की है। बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। इससे पहले राज्य में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 33 टीमें तथा करीब 700 सरकारी नावें तैनात की गई थीं, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी का पानी घटने के बावजूद तटवर्ती और निचले इलाकों में जमा पानी जल्दी नहीं निकलता। ऐसे में लोगों को अभी भी घाटों, तेज बहाव वाले हिस्सों और बाढ़ के पानी में जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। जलस्तर में दोबारा वृद्धि होने की स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है।
