लाइव सिटीज, पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के नेता संतोष सुमन ने देश में आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि इसका लाभ समाज के उन वर्गों तक पहुंचाना होना चाहिए, जो अब भी इससे अपेक्षित रूप से लाभान्वित नहीं हो पाए हैं।
संतोष सुमन ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण यानी ‘कोटा के अंदर कोटा’ की व्यवस्था का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि एक बड़े सामाजिक वर्ग के भीतर भी अलग-अलग समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में अंतर है, तो आरक्षण का लाभ समान रूप से सभी तक पहुंचाने के लिए वर्गीकरण पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे लाने के उद्देश्य से लागू है। ऐसे में यह भी देखना जरूरी है कि इसका लाभ किन समुदायों को कितना मिला और कौन-से वर्ग अभी भी पीछे छूटे हुए हैं। संतोष सुमन ने कहा कि आरक्षण की समीक्षा को आरक्षण खत्म करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
संतोष सुमन ने दलित समाज के भीतर भी अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि किसी वर्ग के कुछ समुदाय लगातार आरक्षण का अधिक लाभ उठा रहे हैं और कुछ समुदाय अब भी पीछे हैं, तो सबसे वंचित लोगों तक अवसर पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए। उनके मुताबिक, इसका मकसद आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे अधिक न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पहले भी समर्थन किया था और आगे भी इस मुद्दे पर अपनी राय कायम रखेगी। संतोष सुमन का तर्क है कि सामाजिक न्याय तभी सार्थक होगा, जब आरक्षण का वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो सबसे अधिक वंचित हैं।
