लाइव सिटीज, पटना: बारिश के मौसम के बीच राजधानी पटना में डेंगू का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। लगातार सामने आ रहे नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। पटना में इस सीजन डेंगू से पहली मौत भी हो चुकी है। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों के दौरान करीब 40 नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। 31 अगस्त तक राजधानी में इस साल डेंगू के कुल 167 मामले सामने आ चुके हैं।
अगस्त में अचानक बढ़ी मरीजों की संख्या
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल के शुरुआती महीनों में डेंगू की स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में थी। जनवरी से जून तक पटना में 44 मरीज मिले थे। जुलाई में 26 नए मामले सामने आए। इसके बाद अगस्त में संक्रमण ने अचानक रफ्तार पकड़ ली और अकेले इसी महीने 97 मरीजों की पहचान हुई। यानी जुलाई की तुलना में अगस्त में डेंगू के मामले कई गुना बढ़ गए।सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि संक्रमण की रफ्तार लगातार बनी हुई है। पिछले पांच दिनों में ही 18 नए मरीज सामने आने की जानकारी है। इससे साफ है कि राजधानी में डेंगू का खतरा अभी कम नहीं हुआ है।
कंकड़बाग समेत कई इलाकों में ज्यादा मामले
पटना के कुछ हिस्सों में डेंगू के मामले अपेक्षाकृत अधिक सामने आ रहे हैं। कंकड़बाग, अशोक नगर और हनुमान नगर समेत आसपास के इलाकों को संवेदनशील माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में लगातार नए मरीज मिलने के कारण स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
डेंगू फैलाने वाले मच्छर साफ पानी में जमा लार्वा से पनपते हैं। ऐसे में घरों के आसपास जमा पानी, खुले कंटेनर, गमले, कूलर और अन्य जगहों पर पानी ठहरने से मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है। बारिश के बाद यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
डेंगू से 30 वर्षीय स्कूल कर्मचारी की मौत
पटना में इस सीजन डेंगू से पहली मौत एक 30 वर्षीय स्कूल कर्मचारी की हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वह कुर्जी इलाके का रहने वाला था और लोयोला हाई स्कूल में कर्मचारी के रूप में काम करता था। तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद राजधानी में डेंगू को लेकर चिंता और बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू के मामलों में शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज बुखार, सिर और शरीर में दर्द, कमजोरी, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
सरकारी और निजी अस्पतालों में हो रही जांच
डेंगू के मरीजों की पहचान सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में हो रही जांच के जरिए भी की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल के अनुसार अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में जांच के दौरान मरीजों की पहचान हो रही है।स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकना है। इसके लिए संदिग्ध इलाकों की निगरानी, मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों की पहचान और लोगों को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल राजधानी में डेंगू के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। अगस्त में मामलों में हुई तेज वृद्धि और सितंबर की शुरुआत में हुई पहली मौत ने संकेत दिया है कि पटना में डेंगू को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है। ऐसे में प्रशासनिक निगरानी के साथ आम लोगों की सतर्कता भी संक्रमण पर नियंत्रण पाने में अहम भूमिका निभाएगी।
