लाइव सिटीज, दरभंगा: देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने दरभंगा में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
प्रशांत किशोर ने कहा कि बात केवल एक व्यक्ति ज्ञानेश कुमार की नहीं है. वह तो चुनाव आयोग की अक्षमता का एक सिंबल बन गए हैं. ज्ञानेश कुमार के आने से पहले राजीव कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त थे और उनके कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठे थे. उन्होंने भी चुनाव आयोग को ऐसे ही चलाया है. जब वह रिटायर हुए तो उन्हें देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक का चेयरमैन बना दिया गया.
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की जो प्रतिष्ठा और विश्वसनियता है, वह दांव पर है. दांव पर किसी एक व्यक्ति या एक घटना की वजह से नहीं है. हर मोर्चे पर चुनाव आयोग सत्ता रूढ़ दल के साथ दिख रहा है. इसलिए जनता को चुनाव निष्पक्ष नहीं लग रहे हैं.
उन्होंने चुनाव आयोग पर कटाक्ष करते हुए आगे कहा, पिछले सात-आठ वर्षों में मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की समय-सारिणी, आदर्श आचार संहिता लागू कराने और मतगणना सहित कई स्तरों पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं. उन्होंने बिहार में चुनाव के दौरान मतदाताओं को 10 हजार देकर वोट खरीदने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जनता के बीच यह धारणा बन रही है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रहे हैं और इसी वजह से देशभर में आंदोलन देखने को मिल रहा है.
प्रशांत किशोर ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने की व्यवस्था में भी बदलाव होना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा और मजबूत हो सके.
