लाइव सिटीज , वैशाली: बिहार में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच राज्य के शिक्षा मंत्री और बीजेपी नेता मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके परिवारों के बच्चों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या नहीं, इस पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे संविधान के तहत बनी मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करने की बात नहीं कर रहे हैं।
हाजीपुर पहुंचे थे शिक्षा मंत्री
मिथिलेश तिवारी रविवार को दरभंगा से एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे। इसी दौरान वे हाजीपुर पहुंचे, जहां स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। यहां मीडिया से बातचीत के दौरान उनसे आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर सवाल किया गया।
मंत्री ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य उन वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, जो लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे हैं। ऐसे में यदि किसी परिवार की स्थिति काफी बेहतर हो चुकी है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का लाभ जारी रखने के सवाल पर विचार किया जा सकता है।
‘आरक्षण का उद्देश्य जरूरतमंदों को आगे बढ़ाना’
शिक्षा मंत्री के मुताबिक आरक्षण की व्यवस्था का मकसद समाज के वंचित तबकों को शिक्षा, रोजगार और अन्य अवसरों में आगे आने का रास्ता उपलब्ध कराना है। उनका तर्क है कि जिन परिवारों को लंबे समय से आरक्षण का लाभ मिल रहा है और अब वे आर्थिक तथा सामाजिक रूप से मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं, उनके मामले में अलग से विचार किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख भी जताया। उनके अनुसार संविधान के तहत बनाई गई आरक्षण व्यवस्था एक परिपक्व व्यवस्था है और इसका उद्देश्य वंचित वर्गों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
चिराग पासवान और HAM नेताओं के बयान पर भी बोले
आरक्षण के मुद्दे पर हाल में एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं के बीच सामने आए अलग-अलग विचारों पर भी मिथिलेश तिवारी ने प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान तथा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) से जुड़े नेताओं के बयानों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सभी नेता अनुभवी और वरिष्ठ हैं।उन्होंने संकेत दिया कि गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं के बीच किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय होना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। ऐसे मामलों में तीसरे पक्ष को विवाद बढ़ाने के बजाय संयम बरतना चाहिए।
NDA में दरार की अटकलों को किया खारिज
एनडीए में आरक्षण को लेकर अलग-अलग बयानों के बाद गठबंधन में मतभेद की चर्चाओं पर भी शिक्षा मंत्री ने स्थिति साफ करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर नेताओं की व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन इसे गठबंधन में दरार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मिथिलेश तिवारी ने कहा कि एनडीए के भीतर किसी तरह की टूट या गंभीर मतभेद की बात को खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन एकजुट है और उसके घटक दल मिलकर काम कर रहे हैं।
