लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: देशभर में सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ ही रेलवे ने ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खासकर कोहरे के दौरान ट्रेनों की आवाजाही में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में लोको पायलटों (ट्रेन चालकों) की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जीपीएस आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत ट्रेन चलाते समय लोको पायलट अपने निजी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यदि कोई चालक ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन चलाता हुआ पाया जाता है तो इसकी सूचना कंट्रोल कार्यालय तक पहुंचेगी और मामले की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
GPS सिस्टम से रखी जाएगी लोको पायलटों पर नजर
रेलवे की नई व्यवस्था के तहत लोको पायलटों को जीपीएस सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी मदद से ट्रेन संचालन के दौरान उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। यदि कोई लोको पायलट ट्रेन चलाते समय निजी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता है तो इसकी जानकारी संबंधित कंट्रोल कार्यालय तक पहुंच जाएगी।
इसके बाद रेलवे के अधिकारी मामले की जांच करेंगे। जरूरत पड़ने पर जांच टीम गठित की जाएगी। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित लोको पायलट के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
रेलवे का मानना है कि ट्रेन संचालन के दौरान चालक का पूरा ध्यान सिग्नल, ट्रैक और ट्रेन की गति पर होना बेहद जरूरी है। मोबाइल फोन पर बातचीत, मैसेज देखने या अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहने से उसका ध्यान भटक सकता है। ऐसी स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
रायबरेली से गुजरने वाली 35 जोड़ी ट्रेनों पर विशेष नजर
फिलहाल इस सुरक्षा योजना को उत्तर प्रदेश के रायबरेली रेलखंड से जुड़ी व्यवस्था के तहत लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां से गुजरने वाली 35 जोड़ी ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को लेकर रेलवे ने विशेष सतर्कता बरतने का फैसला लिया है।
सर्दियों में इस रेलखंड पर कोहरे और कम दृश्यता की स्थिति को देखते हुए इंजन की लाइटों को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। ठंड और कोहरे के दौरान ट्रेन की लाइटें चालू रखने पर जोर दिया गया है, ताकि लोको पायलट को आगे की स्थिति समझने में मदद मिले और दूसरे रेलकर्मियों को भी ट्रेन की मौजूदगी का पता चल सके।
परिवार से जरूरी बात करनी हो तो क्या करेंगे लोको पायलट?
रेलवे ने मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के साथ लोको पायलटों की पारिवारिक जरूरतों का भी ध्यान रखा है। कई बार ड्यूटी के दौरान परिवार में कोई जरूरी परिस्थिति पैदा हो सकती है और चालक से संपर्क करना आवश्यक हो जाता है।
ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्य सीधे लोको पायलट के निजी मोबाइल पर संपर्क करने के बजाय नजदीकी लोको लॉबी के अधिकारियों से संपर्क कर सकेंगे। इसके बाद संबंधित अधिकारी लोको पायलट तक जरूरी संदेश पहुंचाने और उनसे बातचीत कराने की व्यवस्था करेंगे।इससे आपातकालीन स्थिति में परिवार और लोको पायलट के बीच संपर्क बना रहेगा। साथ ही ट्रेन चलाते समय मोबाइल के कारण चालक का ध्यान भटकने की आशंका भी कम होगी।
