लाइव सिटीज, पटना: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान एक बार फिर बिहार की सियासत में चर्चा के केंद्र में हैं। पिछले कुछ समय से कई मुद्दों पर उनका रुख भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के दूसरे घटक दलों से अलग दिखाई दे रहा है। खासकर चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चिराग के हालिया बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या वह भविष्य में एनडीए से अलग रास्ता अपना सकते हैं। हालांकि, फिलहाल चिराग पासवान या उनकी पार्टी की ओर से एनडीए छोड़ने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
SIR पर चिराग ने मांगा चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण
चिराग पासवान ने हाल में चुनाव आयोग से SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और अगर उसके कामकाज को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं तो आयोग को स्वयं सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चिराग ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है, बल्कि जनता के बीच पैदा हो रहे भ्रम को दूर करना है। उनके इस रुख को एनडीए के भीतर एक अलग राजनीतिक लाइन के तौर पर देखा जा रहा है।
NDA में रहते हुए कई मुद्दों पर अलग राय
चिराग पासवान का बीजेपी से अलग रुख केवल SIR तक सीमित नहीं है। आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी उनका रुख एनडीए के कुछ सहयोगी नेताओं से अलग रहा है। अनुसूचित जाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर और आरक्षण के भीतर अलग वर्गीकरण जैसे मुद्दों पर चिराग ने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का विरोध किया है।
इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के साथ भी चिराग की अलग राय सामने आ चुकी है। दोनों नेताओं के बयानों के बाद एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा तेज हुई थी।
बिहार में कानून-व्यवस्था पर भी उठा चुके हैं सवाल
चिराग पासवान कई मौकों पर बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर भी अपनी ही सरकार के सामने सवाल उठा चुके हैं। हाल में छात्राओं और महिलाओं से जुड़े मामलों को लेकर उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
अगस्त 2026 में पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी चिराग ने कहा था कि सत्ता में होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी पार्टी हर मुद्दे पर चुप रहेगी। उन्होंने साफ किया था कि गलत को गलत कहना जरूरी है, चाहे सरकार में उनकी पार्टी की भागीदारी ही क्यों न हो।
क्या सचमुच NDA छोड़ने की तैयारी है?
यहीं सबसे बड़ा सवाल है। उपलब्ध ताजा घटनाक्रम में चिराग पासवान के NDA छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसके उलट, इससे पहले वह सार्वजनिक रूप से NDA छोड़ने की अटकलों को खारिज कर चुके हैं। अगस्त 2025 में उन्होंने कहा था कि जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, तब तक NDA से अलग होने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने की अटकलों को भी खारिज किया था।
इसलिए मौजूदा स्थिति को NDA से अलग होने के फैसले के बजाय गठबंधन के भीतर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक लाइन रखने के रूप में देखा जा सकता है। हालिया SIR विवाद में चिराग का रुख इसका ताजा उदाहरण है।
चिराग के रुख से क्यों बढ़ी चर्चा?
चिराग पासवान की राजनीति लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन और अपनी पार्टी की स्वतंत्र पहचान—दोनों के बीच संतुलन बनाने वाली रही है। वह केंद्र की NDA सरकार में मंत्री हैं और उनकी पार्टी बिहार में भी गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में जब वह किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर बीजेपी या गठबंधन के दूसरे दलों से अलग बयान देते हैं, तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक अटकलें तेज हो जाती हैं।
हालिया मामले में भी ऐसा ही हुआ है। चिराग के साथ NDA के एक अन्य सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से SIR विवाद पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है। वहीं बीजेपी की ओर से कहा गया है कि गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं को अपने मुद्दों पर बोलने का अधिकार है।
फिलहाल NDA में हैं चिराग, आगे की तस्वीर पर नजर
फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक बयानों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि चिराग पासवान NDA छोड़ने जा रहे हैं। इतना जरूर है कि वह कई मुद्दों पर गठबंधन के प्रमुख दल बीजेपी से अलग अपनी बात रख रहे हैं और अपनी पार्टी के राजनीतिक हितों तथा मुद्दों को खुलकर सामने ला रहे हैं।
इसलिए अभी सबसे अहम बात यह है कि चिराग NDA से बाहर जाने का ऐलान नहीं कर चुके हैं, लेकिन गठबंधन के भीतर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज जरूर मजबूत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में उनके बयानों और पार्टी के फैसलों से ही यह स्पष्ट होगा कि यह केवल मुद्दा आधारित राजनीतिक रुख है या गठबंधन की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
