लाइव सिटीज, पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने SIR को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का सामान्य और महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके मुताबिक, SIR को लेकर जिस तरह से सवाल उठाए जा रहे हैं, उससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर बिना पर्याप्त तथ्य के आरोप लगाने का आरोप लगाया।
2003 में भी हुआ था मतदाता सूची का पुनरीक्षण
सम्राट चौधरी ने अपने बयान में 2003 में हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी बिहार में मतदाता सूची को लेकर अभियान चलाया गया था। सम्राट चौधरी ने आरोप लगाया कि उस समय राबड़ी देवी की सरकार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।
हालांकि, 2003 के अभियान को लेकर सम्राट चौधरी द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। उन्होंने इसी पुराने उदाहरण के जरिए मौजूदा SIR पर विपक्ष के सवालों को चुनौती दी।
राहुल गांधी और तेजस्वी पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित करना है। इसमें गलत जानकारी को ठीक करने के साथ नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और मृत या दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोगों के नामों को नियमानुसार अपडेट करने की प्रक्रिया शामिल है।
उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को किसी भी आरोप को तथ्यों और दस्तावेजों के साथ सामने रखना चाहिए। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक बयानबाजी से मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनती है।
चुनाव आयोग के बचाव में उतरे सम्राट
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों के बीच सम्राट चौधरी ने आयोग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप लगाने से पहले पूरी जानकारी सामने रखी जानी चाहिए।
सम्राट ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसले किसी एक व्यक्ति के स्तर पर नहीं लिए जाते, बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत प्रक्रिया के तहत निर्णय होते हैं।
‘जिनकी पार्टी में लोकतंत्र नहीं, वे लोकतंत्र पर सवाल उठा रहे’
सम्राट चौधरी ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर परिवारवाद को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राजनीतिक दलों में परिवार का प्रभाव प्रमुख है, उनके नेताओं को चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले अपने दलों की व्यवस्था पर भी बात करनी चाहिए।
उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों पर भी कटाक्ष किया, जिनमें चुनाव आयोग के कथित दुरुपयोग की बात कही जा रही है। सम्राट ने कहा कि लोकतंत्र और संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों को अपने राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के लंबे राजनीतिक शासन का जिक्र करते हुए पार्टी पर देश की गरीबी और आर्थिक समस्याओं के लिए जिम्मेदारी डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस आज चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।
सम्राट चौधरी ने कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि सत्ता में रहने के दौरान संस्थाओं को लेकर अलग नजरिया था, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
SIR पर आगे भी जारी रह सकता है सियासी विवाद
बिहार में SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार इस प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं।
सम्राट चौधरी का ताजा बयान इसी राजनीतिक टकराव को आगे बढ़ाता है। उन्होंने साफ तौर पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से SIR को लेकर तथ्य सामने रखने की मांग की और 2003 के मतदाता सूची पुनरीक्षण का उदाहरण देते हुए विपक्ष के मौजूदा विरोध पर सवाल खड़े किए।
