लाइव सिटीज, पटना: बिहार में शराबबंदी लागू हुए करीब एक दशक बीत चुका है। इस दौरान शराब के अवैध कारोबार पर कार्रवाई के साथ अब सरकार के सामने नशीले पदार्थों की तस्करी और इस्तेमाल पर लगाम लगाने की चुनौती भी सामने आ रही है। चरस, हेरोइन और अफीम जैसे मादक पदार्थों की बरामदगी को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चिंता जताई है। सरकार अब इस समस्या से निपटने के लिए कई जिलों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री ने शराबबंदी को बिहार के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब बिहार में शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया था, तब राजस्व का बड़ा नुकसान होने की आशंका थी। उस समय राज्य का बजट करीब 50 से 55 हजार करोड़ रुपये के आसपास था। इसके बावजूद राजस्व की चिंता किए बिना शराबबंदी जैसा बड़ा फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक जीवन में शराबबंदी सबसे बड़ा फैसला रहा है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी को सफल बनाने के लिए केवल कानून बनाना या कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऊपर से लेकर नीचे तक लोगों को जागरूक करना होगा। गांव, पंचायत और समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ना होगा, तभी नशामुक्त बिहार का सपना पूरी तरह साकार हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार को सूखे नशे के खिलाफ भी उसी गंभीरता से अभियान चलाना होगा, जिस तरह शराबबंदी को लेकर कार्रवाई की गई। इसके लिए ऐसे जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां नशे के बढ़ते कारोबार और सेवन को लेकर ज्यादा चिंता है। बॉर्डर से जुड़े इलाकों पर भी विशेष नजर रखने की बात कही गई है। पटना, वैशाली, समस्तीपुर और आरा समेत कई इलाकों को इस अभियान में विशेष तौर पर टारगेट करने की बात सामने आई है।
