लाइव सिटीज, पटना: बिहार में आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत व्यवस्था, पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और गांवों के विकास को लेकर बड़ा रोडमैप सामने रखा है। ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों पर करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इस राशि के जरिए गांवों में सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि पंचायतों को अधिकार और संसाधन देने के साथ-साथ प्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों का हिसाब भी जनता के सामने होना चाहिए। मुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद के प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के विकास का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।
अगले पांच वर्षों में पंचायतों को करीब 1 लाख करोड़
सम्राट चौधरी ने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत अगले पांच वर्षों में बिहार की पंचायतों को केंद्र से करीब 52 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा अलग-अलग योजनाओं के तहत लगभग 47 हजार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होगी। इस तरह पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से गांवों के विकास पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक इस राशि का उद्देश्य पंचायतों में विकास की गति बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर जरूरत के हिसाब से योजनाओं को लागू करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों के पास विकास के लिए पर्याप्त संसाधन हों, लेकिन धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
मुखिया को बताना होगा पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ
सम्राट चौधरी ने पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पंचायतों को जो राशि उपलब्ध कराई जाएगी, उसके खर्च का पूरा हिसाब होना चाहिए।
मुखिया को यह बताना होगा कि पंचायत को कितनी राशि मिली, राशि किस समय मिली और उसका इस्तेमाल किन-किन विकास कार्यों में किया गया। इसी तरह प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद के स्तर पर भी विकास कार्यों की जानकारी और उपलब्धियों का हिसाब जनता के सामने रखने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को अधिकार मिलने के साथ उनकी जवाबदेही भी तय होती है। पंचायतों को मजबूत बनाने का मतलब सिर्फ पैसा देना नहीं, बल्कि उस पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी है।
पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के अपने राजस्व स्रोत मजबूत करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों पर अतिरिक्त कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए, लेकिन पंचायत क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय निकायों को राजस्व मिलना चाहिए।
उन्होंने ईंट-भट्ठों, निजी स्कूलों, मोबाइल टावरों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व प्राप्त करने की व्यवस्था की बात कही। इससे पंचायतों के पास अपने स्तर पर कचरा प्रबंधन, पेयजल और दूसरी स्थानीय सुविधाओं पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
पंचायत चुनाव में परिसीमन के बाद बदलेगी तस्वीर
बिहार में 2026 के पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर परिसीमन का काम भी महत्वपूर्ण चरण में है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत परिसीमन से संबंधित अधिसूचनाएं जारी की हैं और ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला परिषद के स्तर पर परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है।
सम्राट चौधरी ने पंचायतों की मौजूदा संरचना को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई जगह आबादी काफी बढ़ चुकी है, लेकिन पंचायतों की सीमाएं उसी अनुपात में नहीं बदली हैं। उनके मुताबिक नियमों के अनुसार पंचायतों की संरचना आबादी के हिसाब से होनी चाहिए।ऐसे में आगामी पंचायत चुनाव परिसीमन की नई व्यवस्था के आधार पर कराने की दिशा में काम चल रहा है।
पंचायत चुनाव को लोकतंत्र की असली परीक्षा बताया
सम्राट चौधरी ने पंचायत चुनाव की जमीनी प्रकृति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांसद या विधायक का चुनाव लड़ना अलग तरह की राजनीतिक प्रक्रिया है, लेकिन गांव में मुखिया या वार्ड सदस्य का चुनाव बेहद सीधा और चुनौतीपूर्ण होता है।
पंचायत चुनाव में उम्मीदवार का सामना अपने गांव, टोले और परिवार तक के मतदाताओं से होता है। मुख्यमंत्री ने इसी वजह से पंचायत चुनाव को लोकतंत्र की जमीनी परीक्षा से जोड़ते हुए इसकी अहमियत बताई।
हर पंचायत में कम से कम 10 प्रमुख विकास योजनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्र में प्रमुख विकास योजनाओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने पंचायतों में कम से कम 10 महत्वपूर्ण योजनाओं को चिन्हित कर उन पर काम करने की जरूरत बताई।
इनमें स्कूलों का विकास, आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाना, स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा बढ़ाना और लंबे समय से उपेक्षित सामुदायिक भवनों का जीर्णोद्धार जैसे काम शामिल हैं।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सरकार की नजर
पंचायतों में बड़ी राशि खर्च होने की स्थिति में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार ने व्यवस्था मजबूत करने की बात कही है। इसके लिए पंचायती राज विभाग में अलग इंजीनियरिंग सेल बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर बनने वाली सड़कों, भवनों और दूसरी आधारभूत संरचनाओं की तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता की जांच को मजबूत करना है।
