लाइव सिटीज, पटना: बिहार की राजनीति में सत्ता के शीर्ष पदों को लेकर एक और बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। बिहार विधान परिषद के मौजूदा सभापति अवधेश नारायण सिंह के जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने की चर्चा है। उनके इस्तीफे के बाद विधान परिषद के सभापति की कुर्सी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पद के लिए जदयू के वरिष्ठ नेता और वर्तमान उपसभापति रामवचन राय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय और औपचारिक प्रक्रिया अभी बाकी है।
क्यों हो रहा है सभापति पद में बदलाव?
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद सत्ता के महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर NDA के भीतर संतुलन की चर्चा चल रही है। मुख्यमंत्री का पद भाजपा के पास है और विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद JDU को दिए जाने की चर्चा शुरू हुई।
20 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस पद को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि अवधेश नारायण सिंह अगले एक-दो दिनों में पद से इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद जदयू के रामवचन राय को कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
रामवचन राय का नाम क्यों चर्चा में?
रामवचन राय फिलहाल बिहार विधान परिषद के उपसभापति हैं। इसलिए यदि सभापति पद रिक्त होता है तो सदन के कामकाज को संभालने के लिहाज से उनका नाम प्रमुखता से सामने आया है।
17 सितंबर की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि सभापति पद में बदलाव होने की स्थिति में रामवचन राय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि उस समय तक बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।
कौन हैं रामवचन राय?
रामवचन राय लंबे समय से बिहार की राजनीति और विधान परिषद से जुड़े रहे हैं। राजनीति के साथ उनका शैक्षणिक और साहित्यिक क्षेत्र से भी संबंध रहा है। वह पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से जुड़े रहे और प्रोफेसर के रूप में भी काम कर चुके हैं। बिहार विधान परिषद की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है।
उनका विधान परिषद में लंबा अनुभव भी है। यही वजह है कि सभापति पद के संभावित बदलाव की चर्चा में उनका नाम सामने आया है।
पहले भी JDU के पास रह चुकी है सभापति की कुर्सी
बिहार विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। अवधेश नारायण सिंह से पहले देवेश चंद्र ठाकुर विधान परिषद के सभापति रहे थे। वहीं, महागठबंधन सरकार के दौरान हारुण रशीद ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली थी।
इसलिए अगर इस बार सभापति का पद जदयू के पास जाता है तो यह विधान परिषद के शीर्ष पद पर पार्टी की वापसी होगी।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद क्या होगा?
मौजूदा स्थिति में बिहार विधान परिषद की वेबसाइट पर अवधेश नारायण सिंह को सभापति और रामवचन राय को उपसभापति के तौर पर दर्ज किया गया है। इसलिए अभी तक बदलाव को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखना चाहिए।
यदि अवधेश नारायण सिंह इस्तीफा देते हैं और उसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो सभापति पद रिक्त होगा। ऐसी स्थिति में सदन के संचालन के लिए कार्यकारी व्यवस्था बनाई जा सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में रामवचन राय को कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना बताई गई है।
NDA के सत्ता संतुलन से जुड़ा पूरा मामला
इस बदलाव को बिहार में भाजपा और जदयू के बीच संवैधानिक पदों के संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के पास मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम पद हैं। ऐसे में विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी जदयू को मिलने की स्थिति में दोनों सहयोगी दलों के बीच पदों के बंटवारे का नया समीकरण दिखाई देगा।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रामवचन राय को नया सभापति बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। फिलहाल उनके नाम की चर्चा और संभावित कार्यकारी सभापति की भूमिका की खबरें सामने आई हैं। अंतिम स्थिति इस्तीफे, उसके स्वीकार होने और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
