लाइव सिटीज, पटना: बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने शराबबंदी की समीक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून की समीक्षा इस बात को समझने के लिए जरूरी है कि जिस उद्देश्य से उसे लागू किया गया था, वह कितना पूरा हुआ है।
चिराग पासवान ने कहा कि शराबबंदी कानून लागू करने के पीछे की सोच का उन्होंने समर्थन किया था, लेकिन आज भी कई जगहों से जहरीली शराब और दूसरे राज्यों से बिहार में शराब पहुंचने की खबरें सामने आती रहती हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि कानून को लागू करने में कहां कमी रह गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के बीच शराबबंदी की जरूरत और इसके उद्देश्य को लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है। अगर सरकार को लगता है कि मौजूदा व्यवस्था में किसी तरह के बदलाव की जरूरत है, तो सहयोगी दलों के साथ चर्चा कर आगे कदम उठाए जा सकते हैं।
शराबबंदी के करीब 10 साल पूरे होने के बाद समीक्षा के सवाल पर चिराग ने कहा कि समीक्षा होनी ही चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस उद्देश्य को लेकर कानून बनाया गया था, क्या बिहार उस लक्ष्य तक पहुंच पाया है? जागरूकता अभियान कितना सफल रहा और जहां सफलता नहीं मिली, वहां किन बदलावों की जरूरत है—इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
