लाइव सिटीज, पटना: बिहार की राजनीति में पूर्व सांसद आनंद मोहन के एक बयान ने आरक्षण और राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आनंद मोहन ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर कहा कि वह आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन समय के साथ इसकी समीक्षा जरूर होनी चाहिए। उनका कहना है कि आरक्षण का वास्तविक फायदा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे हैं।
आनंद मोहन ने कहा कि आरक्षण का मकसद उन वर्गों को आगे बढ़ाना है जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने पिछड़े वर्गों के भीतर आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो चुके लोगों को लेकर भी सवाल खड़े किए।
‘पिछड़ों में भी नए सामंत पैदा हो गए’
आनंद मोहन ने अपने बयान में कहा कि पिछड़े वर्गों के भीतर भी ऐसे लोग तैयार हो गए हैं जो लगातार आरक्षण का लाभ लेते आ रहे हैं और सामाजिक-आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “अब पिछड़ों में भी नए सामंत पैदा हो गए हैं।उनका तर्क है कि आरक्षण की व्यवस्था का उद्देश्य किसी एक समूह के कुछ लोगों को लगातार लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि उन लोगों को अवसर देना है जो वास्तव में पीछे छूट गए हैं। इसलिए समय-समय पर इसकी समीक्षा की जरूरत है।
आरक्षण खत्म करने की बात नहीं, समीक्षा की मांग
आनंद मोहन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी बात को आरक्षण खत्म करने की मांग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि आरक्षण की जरूरत आज भी है, लेकिन इसकी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि उसका लाभ वास्तविक रूप से वंचित और पिछड़े लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरक्षण के लाभार्थियों की स्थिति की समीक्षा किए जाने की जरूरत बताई। यानी उनका जोर आरक्षण समाप्त करने के बजाय इसकी मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा पर है।
क्यों उठी आरक्षण व्यवस्था पर बहस?
आनंद मोहन के बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरक्षण को लेकर बहस फिर तेज होने की संभावना है। बिहार की राजनीति में आरक्षण लंबे समय से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। ऐसे में किसी प्रमुख राजनीतिक चेहरे की ओर से इसके स्वरूप की समीक्षा की मांग राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।आनंद मोहन का कहना है कि किसी भी व्यवस्था को समय और परिस्थितियों के हिसाब से परखा जाना चाहिए। अगर किसी व्यवस्था का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है तो उसके स्वरूप पर विचार होना चाहिए।
नीतीश कुमार को सत्ता से अलग करने पर भी सवाल
आरक्षण के मुद्दे के साथ आनंद मोहन ने बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने नीतीश कुमार को सत्ता से अलग किए जाने के सवाल पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बिहार की राजनीति में किसी बड़े नेता को किनारे करने या सत्ता से अलग करने से पहले उसके राजनीतिक योगदान और मौजूदा परिस्थितियों को भी देखना चाहिए।नीतीश कुमार को लेकर आनंद मोहन पहले भी कई मौकों पर अपनी राय रखते रहे हैं। मार्च 2026 में उन्होंने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर भी असहमति जताई थी और बिहार की राजनीति में इसके असर को लेकर अपनी बात रखी थी।
आनंद मोहन ने अपनी बात रखते हुए मुख्य रूप से कहा कि आरक्षण जरूरी है, लेकिन उसकी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो वास्तव में पिछड़े हैं। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके लोगों को लगातार आरक्षण का लाभ मिलना कितना उचित है।
इसी क्रम में उन्होंने पिछड़े वर्गों के भीतर पैदा हुई असमानता का जिक्र करते हुए कहा कि “पिछड़ों में भी नए सामंत पैदा हो गए हैं।” इसके साथ ही उन्होंने बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका और उन्हें सत्ता से अलग किए जाने के सवाल पर भी अपनी बात रखी।
