लाइव सिटीज, पटना: बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने चुनावों में धांधली और बेईमानी की। तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए पूछा कि अगर उनके पहले के फैसले सही थे, तो अब उन्हीं नियमों और फैसलों में बदलाव क्यों किया जा रहा है?
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग से कई सवाल किए। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि चुनावों में कथित गड़बड़ी किसके कहने पर हुई और अब आयोग अपने पुराने फैसलों से पीछे क्यों हट रहा है।
‘किसके कहने पर चुनावों में धांधली और बेईमानी की?’
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि चुनाव आयोग ने किसके कहने पर चुनावों में धांधली, बेईमानी और डकैती की? उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब अपने पहले के नियमों और फैसलों में बदलाव कर रहा है। राजद नेता ने पूछा कि अगर पहले लिए गए फैसले सही थे, तो अब उन्हें बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
तेजस्वी ने कहा कि चुनाव आयोग को इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवालों के जरिए आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताया और आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचा है।
‘ज्ञानेश कुमार पहले सही थे तो अब फैसलों से पीछे क्यों हट रहे?’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तेजस्वी यादव ने सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार उस समय सही थे, जब पहले के नियम और फैसले लागू किए गए थे, तो अब उन्हीं फैसलों से पीछे हटने की वजह क्या है?
तेजस्वी ने अपने बयान में कहा, ‘या तो वह तब सही थे या अब सही हैं?’ उनके इस सवाल का आशय चुनाव आयोग के पुराने और मौजूदा फैसलों के बीच कथित विरोधाभास को लेकर जवाब मांगना था।
राजद नेता का आरोप है कि आयोग के फैसलों में हो रहे बदलाव से उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, किन फैसलों में बदलाव की बात हो रही है, इस संबंध में आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
‘चुनाव लूटे गए, जनविश्वास का कत्ल हुआ’
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में चुनावी प्रक्रिया को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव लूटे गए और इससे जनता के विश्वास को गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने इसे जनविश्वास का कत्ल और लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
तेजस्वी के इन आरोपों का केंद्र चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि चुनाव से जुड़े विवादों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
SIR को लेकर पहले से चुनाव आयोग पर हमलावर हैं तेजस्वी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर तेजस्वी यादव पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के खिलाफ सबसे पहले राजद ने आवाज उठाई थी और बिहार से ही इस मुद्दे पर विरोध की शुरुआत हुई।
तेजस्वी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की वजह से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने पहले भी आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। ये विपक्ष के आरोप हैं, जिन्हें साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दिल्ली में विपक्ष के मार्च में शामिल हुए थे तेजस्वी
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का विरोध बिहार से लेकर दिल्ली तक पहुंच चुका है। 12 अक्टूबर को तेजस्वी यादव दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल हुए थे। इस विरोध के दौरान मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए।
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात
तेजस्वी यादव का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। उन्होंने एसआईआर के खिलाफ अपने संघर्ष को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
फिलहाल तेजस्वी यादव के ताजा बयान से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों को लेकर राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है। अब इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की ओर से क्या जवाब आता है और विपक्ष के सवालों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
