समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस मुद्दे पर फिलहाल अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले कानून के प्रस्तावित ड्राफ्ट और उसके प्रावधानों को देखा जाएगा। पार्टी का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय इसके हर पहलू को समझना जरूरी है।
JDU नेताओं के मुताबिक, अभी UCC का आधिकारिक ड्राफ्ट सामने नहीं आया है। इसलिए केवल घोषणा के आधार पर पार्टी अपना अंतिम रुख तय नहीं करेगी। ड्राफ्ट उपलब्ध होने के बाद उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा और इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत कर पार्टी अपनी चिंताओं और सुझावों को सामने रखेगी।
सभी पक्षों से चर्चा पर जोर
JDU का कहना है कि समान नागरिक संहिता का असर अलग-अलग समुदायों और उनकी परंपराओं पर पड़ सकता है। ऐसे में कानून बनाने से पहले व्यापक चर्चा जरूरी है। पार्टी पहले भी कह चुकी है कि सभी संबंधित पक्षों, धार्मिक समुदायों और राज्य सरकारों की चिंताओं को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना चाहिए।
पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि JDU का पुराना रुख इस मामले में मार्गदर्शक रहेगा। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते UCC को लेकर विधि आयोग को पत्र भी भेजा गया था, जिसमें सभी समुदायों की भावनाओं और अधिकारों का ध्यान रखने की बात कही गई थी।
अमित शाह से बातचीत के बाद बनेगी रणनीति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात कही है। इसके बाद NDA के भीतर सहयोगी दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। JDU ने अभी अंतिम सहमति देने के बजाय ड्राफ्ट देखने और उसके बाद केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करने का रास्ता चुना है।
इस पूरे मामले में अब निगाहें UCC के आधिकारिक ड्राफ्ट पर हैं। ड्राफ्ट सामने आने के बाद JDU उसके प्रावधानों की समीक्षा करेगी और अमित शाह के साथ बातचीत के बाद गठबंधन के स्तर पर आगे की रणनीति तय की जा सकती है।
