लाइव सिटीज, पटना: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में राहुल झा की राजनीतिक यात्रा छात्र जीवन से शुरू होकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों और विभिन्न राज्यों में चुनावी कार्यों तक पहुंची है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने और प्रतिष्ठित आईटी कंपनी आईबीएम (IBM) में काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में संगठन को अपनी सेवाएं देने का निर्णय लिया। युवाओं को पार्टी से जोड़ने, तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक संवाद को मजबूत करने तथा अलग-अलग राज्यों में चुनावी गतिविधियों में भागीदारी उनकी राजनीतिक यात्रा के प्रमुख पहलू रहे हैं।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद IBM में किया काम
राहुल झा का राजनीतिक सफर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से शुरू हुआ। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आईबीएम जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम किया। वर्ष 2015 तक वह इस कंपनी से जुड़े रहे। हालांकि, कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के बावजूद उनकी रुचि राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों में बनी रही।
इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने का फैसला किया। यह निर्णय उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है, क्योंकि इसके बाद उन्होंने अपना समय और ऊर्जा पार्टी के संगठनात्मक कार्यों को समर्पित कर दिया।
वर्ष 2012 से भाजपा में सक्रिय, अनंत कुमार का मिला मार्गदर्शन
राहुल झा वर्ष 2012 से भाजपा के सक्रिय सदस्य के रूप में कार्य करने लगे थे। इस दौरान उन्हें दिवंगत अनंत कुमार, जो भारत सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके थे, का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। संगठन में उनकी सक्रियता और कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा के विविध भाषा प्रकोष्ठ का सह-संयोजक बनाया गया।
इस जिम्मेदारी के माध्यम से उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों में काम करने का अवसर मिला। शुरुआती दौर में प्राप्त अनुभव ने आगे चलकर पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को विस्तार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बिहार लौटने के बाद भाजयुमो में मिली अहम जिम्मेदारी
वर्ष 2015-16 में बिहार लौटने के बाद राहुल झा को भारतीय जनता युवा मोर्चा, बिहार में आईटी एवं सोशल मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस भूमिका में तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। इसके बाद उन्हें पार्टी के प्रवक्ता के रूप में भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई।
आईटी और सोशल मीडिया के क्षेत्र में उनकी भूमिका के साथ-साथ राजनीतिक संवाद और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ती गई। युवा मोर्चा में काम करते हुए उन्होंने युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें पार्टी की गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम किया।
बिहार यूथ एंबेसडर कार्यक्रम की शुरुआत, देशभर में 27 हजार से अधिक युवाओं तक पहुंच
तत्कालीन भाजयुमो अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में राहुल झा ने बिहार यूथ एंबेसडर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को संगठन से जोड़ना और उनके बीच संवाद को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई में तीन केंद्रों के माध्यम से की गई। इन केंद्रों के जरिए युवाओं को एक मंच पर लाने और उनके साथ संवाद स्थापित करने की पहल की गई। समय के साथ इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ा और उपलब्ध विवरण के अनुसार, आज यह देशभर में 27,000 से अधिक युवाओं से जुड़ चुका है।यह पहल राहुल झा की राजनीतिक यात्रा में युवाओं के साथ संपर्क स्थापित करने और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के प्रयास के रूप में महत्वपूर्ण रही है।
कर्नाटक से बिहार तक चुनावी जिम्मेदारियां
राहुल झा को संगठन में काम करने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी जिम्मेदारियां मिलीं। वर्ष 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें बेंगलुरु में पूर्वांचली मतदाताओं के बीच काम करने की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान उन्होंने मतदाताओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी निभाई।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा बिहार के मुख्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह दायित्व बिहार में पार्टी के चुनावी कार्यों और मुख्यालय से जुड़ी गतिविधियों के बीच समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण था।
इसी वर्ष झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने रांची के विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्य किया। अलग-अलग राज्यों में मिली इन जिम्मेदारियों से उन्हें विभिन्न चुनावी परिस्थितियों में काम करने का अनुभव प्राप्त हुआ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में देवेंद्र फडणवीस के प्रोटोकॉल प्रभारी बने
वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल झा को महाराष्ट्र के तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस का प्रोटोकॉल प्रभारी बनाया गया। इस जिम्मेदारी के तहत उन्हें चुनावी दौरे और संबंधित संगठनात्मक व्यवस्थाओं से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाने का अवसर मिला।
इससे पहले और बाद में अलग-अलग राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां संभालने के कारण उनकी राजनीतिक यात्रा केवल बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें दूसरे राज्यों में भी पार्टी के लिए काम करने का अनुभव मिला।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टॉलीगंज सीट पर संभाली जिम्मेदारी
वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल झा को टॉलीगंज विधानसभा सीट पर संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई। यहां भी उन्होंने पार्टी की चुनावी गतिविधियों से जुड़े कार्यों में भागीदारी निभाई।
कर्नाटक, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अलग-अलग समय पर मिली जिम्मेदारियां उनके संगठनात्मक अनुभव का हिस्सा बनीं। इन चुनावों में काम करने के दौरान उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ताओं और संगठन के साथ समन्वय स्थापित करने का अवसर मिला।
वर्ष 2023 में भाजयुमो बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष बने
संगठन में लगातार योगदान और विभिन्न जिम्मेदारियों के अनुभव को देखते हुए वर्ष 2023 में राहुल झा को भारतीय जनता युवा मोर्चा, बिहार का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। यह जिम्मेदारी उनके राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही।
प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका युवा मोर्चा की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों से जुड़ी रही। इससे पहले वह आईटी एवं सोशल मीडिया संयोजक, पार्टी प्रवक्ता और विभिन्न चुनावों में जिम्मेदारी निभा चुके थे। इस प्रकार उनकी यात्रा संगठन के शुरुआती कार्यों से आगे बढ़कर प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी तक पहुंची।
तकनीक, संगठन और युवा संपर्क पर रहा विशेष जोर
राहुल झा की राजनीतिक यात्रा में तीन प्रमुख पहलू सामने आते हैं—संगठनात्मक कार्य, तकनीक एवं सोशल मीडिया का इस्तेमाल और युवाओं को जोड़ने की पहल। इंजीनियरिंग की पढ़ाई तथा आईटी क्षेत्र में काम करने का अनुभव उनके संगठनात्मक सफर की पृष्ठभूमि का हिस्सा रहा। वहीं, भाजपा और भाजयुमो में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की।
बिहार यूथ एंबेसडर कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अलग-अलग राज्यों के चुनावों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने तक उनका सफर कई चरणों से गुजरा है। वर्ष 2013 में विविध भाषा प्रकोष्ठ के सह-संयोजक की जिम्मेदारी से शुरू हुआ संगठनात्मक विस्तार वर्ष 2023 में भाजयुमो बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष बनने तक पहुंचा।
छात्र जीवन से प्रदेश स्तर तक पहुंचा राजनीतिक सफर
राहुल झा की राजनीतिक यात्रा छात्र जीवन में शुरू हुई और आगे चलकर भाजपा के विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों तक पहुंची। आईबीएम की नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक राजनीतिक कार्यकर्ता बनने का निर्णय, वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन, युवा मोर्चा में तकनीकी और सोशल मीडिया से जुड़ी भूमिका तथा कई राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां उनके सफर के प्रमुख पड़ाव रहे हैं।
उनकी यात्रा युवाओं को संगठन से जोड़ने, तकनीक के माध्यम से राजनीतिक संवाद को मजबूत करने और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वर्ष 2023 में भाजयुमो बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष बनने के साथ उनकी संगठनात्मक भूमिका को प्रदेश स्तर पर नई पहचान मिली।
