लाइव सिटीज, पटना: बिहार की राजनीति में वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर नेताओं ने सवाल उठाए हैं। इसी दौरान जीतन राम मांझी को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की गई। मांझी के एक पीड़ित परिवार से मिलने जाने और कुर्सी लेकर पहुंचने को लेकर सियासी चर्चा गर्म है।
बच्चों की मौत की घटना पर जताया दुख
पश्चिमी क्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चों के हताहत होने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता ने कहा कि उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से घटना के बारे में जानकारी मिलने की बात कही।उन्होंने कहा कि वह अगले दिन पटना लौट रहे हैं और कोशिश करेंगे कि वहां जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करें। घटना को दुखद बताते हुए उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की कि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाएं और दुर्घटनाएं न हों।
जीतन राम मांझी को लेकर क्या कहा?
जीतन राम मांझी के पीड़ित परिवार से मिलने जाने और कुर्सी लेकर पहुंचने के मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में नेता ने तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में कुछ नेता ऐसे हैं, जिनका राजनीतिक दौर अब अंतिम चरण में है। उनके मुताबिक, जीतन राम मांझी भी उन्हीं नेताओं में शामिल हैं।
उन्होंने मांझी की राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब दूसरे लोगों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने नेताओं के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को राजनीति में जगह मिलने को लेकर भी टिप्पणी की।हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इस बयान से साफ है कि मांझी को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
वोट चोरी के मुद्दे पर क्या बोले नेता?
वोट चोरी के आरोपों और इसे लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर नेता ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल का मामला नहीं है, बल्कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है।उन्होंने कहा कि पिछले आठ से दस वर्षों में चुनाव कराने के तरीके, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर समाज के एक बड़े वर्ग में असंतोष दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
SIR और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
नेता ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के जरिए मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के नाम काटे जाने को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 सहित मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रक्रियाओं को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा हुआ है। साथ ही उन्होंने चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू कराने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यशैली ऐसी दिखाई देती है, जिससे सत्ता में बैठे दल को मदद मिलने की आशंका पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाज का एक बड़ा वर्ग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है।
चुनाव आयोग में पारदर्शी सुधार की मांग
वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर नेता ने कहा कि जब तक चुनाव आयोग की कार्यशैली में विश्वसनीयता और पारदर्शिता लाने वाले सुधार नहीं किए जाते, तब तक इस तरह के प्रदर्शन जारी रह सकते हैं।उन्होंने कहा कि यह किसी एक नेता या पार्टी तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया पर जनता के भरोसे से जुड़ा मामला है।
प्रशांत किशोर के मुताबिक, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि लोगों का भरोसा मजबूत हो सके।
