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जय हो छठी मइया: भागलपुर की मुस्लिम महिलाओं ने इसलिए त्याग दिया मांसाहार, तोड़ दी मजहबी दीवार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क:भागलपुर की मुस्लिम महिलाएं लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के लिए हिंदू धर्म के रक्षा कवच (बद्धी) का निर्माण करती हैं, उनका ये काम उनका पुश्तैनी है.बद्धी निर्माण करने वाली इन महिलाओं के घर में एक महीने पहले से ही मांस और लहसुन प्याज खाना वर्जित हो जाता है.वे पूरी तरह मांसाहार को त्याग देती हैं.स्वच्छता के साथ-साथ बद्धी का निर्माण इन्हीं महिलाओं के द्वारा किया जाता है.

आगे बढ़ने से पहले बद्धी के बारे में जानना भी जरूरी हो जाता है. त की माला जिसे बद्धि कहा जाता है, ये माला या सिकड़ी के आकार का चार लड़ियों वाला एक गहना होता है.इसकी दो लड़ें तो गले में होती हैं और दो लड़ें दोनों कंधों पर से जनेऊ की तरह बांहों के नीचे होती हैं, जो छाती और पीठ तक लटकी रहती हैं.

छठ व्रत की आस्था और पवित्रता के साथ इसके कार्य किए जाते हैं.इसमें भागलपुर की मुस्लिम महिलाओं का योगदान भी असीम है.छठ पर आपसी सद्भाव, भाईचारा और सौहार्द की अनोखी बानगी भागलपुर के काजीचक खरादी टोला पन्नामील में देखने को मिलती है.यहां बद्धी का निर्माण मुस्लिम महिलाएं पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ करती हैं.

काजीचक खरादी टोला की रहने वाली मुस्लिम महिलाओं ने गंगा-जमुई तहजीब को चरितार्थ कर रखा है.महजब की दीवारें तोड़ते हुए यहां की महिलाओं ने मांसाहार को त्याग रखा है। बद्धी निर्माण में लगी इन महिलाओं ने प्रसाद के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले बद्धि को पूरी नेम निष्ठा और पाक साफ तरीके से तैयार किया है.

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