लाइव सिटीज, पटना: पटना के ग्रामीण इलाकों में लंबित आपराधिक मामलों के अनुसंधान और निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कोमल मीणा ने 11 थानों के 72 पुलिस पदाधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है। सितंबर महीने में अपराध और लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं होने की बात सामने आई थी।
इस कार्रवाई का उद्देश्य पुलिस जांच की प्रक्रिया में तेजी लाना और लंबित मामलों को समय पर निपटाना है। पुलिस अधिकारियों को अपने जिम्मे के मामलों की जांच निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करनी होती है। समीक्षा में लक्ष्य से पीछे रहने वाले अनुसंधानकर्ताओं पर कार्रवाई की गई है।
अपराध समीक्षा बैठक में सामने आई लापरवाही
सितंबर महीने में हुई समीक्षा के दौरान ग्रामीण एसपी ने विभिन्न थानों में दर्ज आपराधिक मामलों की जांच और उनके निष्पादन की स्थिति का आकलन किया। इसमें पाया गया कि कई अनुसंधानकर्ता अपने जिम्मे के मामलों में तय न्यूनतम लक्ष्य हासिल नहीं कर सके।
पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित नहीं होती। उन्हें मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान लेने, आरोपियों की भूमिका की जांच करने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई पूरी करने की जिम्मेदारी भी निभानी होती है।
इन 11 थानों के पुलिस पदाधिकारी कार्रवाई के दायरे में
वेतन रोकने की कार्रवाई पटना ग्रामीण क्षेत्र के 11 थानों में तैनात पुलिस पदाधिकारियों पर की गई है। थानावार संख्या इस प्रकार बताई गई है:
बख्तियारपुर थाना: 13 पुलिस पदाधिकारी
बाढ़ थाना: 11 पुलिस पदाधिकारी
अथमलगोला थाना: 10 पुलिस पदाधिकारी
फतुहा थाना: 8 पुलिस पदाधिकारी
खुसरूपुर थाना: 7 पुलिस पदाधिकारी
पंडारक थाना: 6 पुलिस पदाधिकारी
दीदारगंज थाना: 5 पुलिस पदाधिकारी
सालिमपुर थाना: 5 पुलिस पदाधिकारी
मरांची थाना: 3 पुलिस पदाधिकारी
मोकामा थाना: 2 पुलिस पदाधिकारी
नदी थाना: 2 पुलिस पदाधिकारी
अगले आदेश तक वेतन पर रोक
फिलहाल संबंधित 72 पुलिस पदाधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप मामलों का निष्पादन नहीं करने के आधार पर की गई है। वेतन पर लगी रोक कब हटेगी और इसके लिए क्या शर्तें तय की जाएंगी, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।पटना ग्रामीण पुलिस की इस कार्रवाई को लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी लाने और थानों के कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
