लाइव सिटीज, पटना: बिहार में विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के वेतनमान और युवाओं के रोजगार को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है। हाजीपुर में शिक्षक संवाद के दौरान उन्होंने शिक्षकों के सातवें वेतनमान की मांग को लेकर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए राजनीतिक दबाव बनाना जरूरी है। उन्होंने केंद्र और बिहार की सत्ताधारी राजनीति पर भी निशाना साधा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ दिलाना जन सुराज की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि बिहार में लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद एनडीए शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने में सफल नहीं हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में समान काम के बदले समान वेतन का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन शिक्षकों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि अगर बिहार के लगभग छह लाख शिक्षक अपनी मांगों को लेकर एक साथ खड़े हो जाएं, तो राजनीतिक दलों के लिए उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।उनके मुताबिक, शिक्षक केवल अपने वेतनमान के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अपने परिवार के भविष्य के लिए भी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने हितों को ध्यान में रखकर एमएलसी चुनाव में फैसला लें।
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले तक का लक्ष्य सामने रखा है। उन्होंने इस मुद्दे को अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि शिक्षकों के हितों के लिए दबाव बनाया जाएगा।
इससे पहले भी वह कह चुके हैं कि अगर जन सुराज के उम्मीदवार एमएलसी चुनाव में जीतते हैं, तो शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने के लिए पहल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि वह ऐसा नहीं कर सके, तो भविष्य में वोट मांगने नहीं आएंगे। यह उनका राजनीतिक संकल्प है, न कि सातवां वेतनमान लागू होने की कोई सरकारी घोषणा।
