लाइव सिटीज, पटना: पटना नगर निगम में उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब नगर निगम ने अपने ही मेयर सीता साहू को नोटिस जारी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवासीय क्षेत्रों के गैर-आवासीय उपयोग को लेकर नगर निगम की ओर से कार्रवाई शुरू की गई है.इसी क्रम में मेयर सीता साहू समेत पटना के करीब 27 हजार लोगों को नोटिस भेजा गया है. आरोप है कि आवासीय क्षेत्र में बने भवनों का इस्तेमाल गैर-आवासीय गतिविधियों के लिए किया जा रहा है.
कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही नगर निगम ऐसे आवासीय प्रॉपर्टी की जांच कर रहा है, जो कागजों पर तो आवासीय हैं, लेकिन जमीन पर उनका इस्तेमाल कमर्शियल/गैर-आवासीय काम के लिए हो रहा है. इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट निगरानी कर रहा है. कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने वार्ड वार सर्वे कराया और सर्वे के बाद ऐसे प्रॉपर्टी मालिकों को नोटिस भेजकर आवासीय क्षेत्र के उपयोग को लेकर जवाब मांगा है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए अजीमाबाद अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी ने पटना मेयर सीता साहू समेत करीब 27,000 लोगों को नोटिस भेज दिया है. चिह्नित स्थलों के भू-स्वामियों, निर्माताओं और गैर-आवासीय उपयोगकर्ता को भेजे नोटिस के बाद उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए 24 घंटों का समय दिया गया है. जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है उनमें पटना के कई बड़े लोगों के नाम शामिल हैं.
इसी के तहत पटना की मेयर सीता साहू को भी नोटिस भेजा गया है. इसके अलावा नगर निगम ने बड़ी पटनदेवी, महाराजगंज निवासी महापौर के साथ उनके दोनों बेटों शिशिर कुमार और सुशांत कुमार को भी नोटिस भेजा है. पदाधिकारी ने जिन्हें भी नोटिस भेजा है, उन्हें 24 घंटे के अंदर गैर-आवासीय उपयोग से संबंधित दस्तावेज, स्वीकृत नक्शा और उसके इस्तेमाल की पूरी जानकारी देने के लिए कहा है. इसमें पूछा गया है कि आखिर आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय उपयोग क्यों किया जा रहा है.
