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छह जिलों के सदर अस्पतालों की स्वास्थ्य सचिव ने की समीक्षा, सर्जरी की संख्या के साथ प्रकार बढ़ाने का निर्देश

लाइव सिटीज, पटना: बिहार में जिला स्तर पर मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने सर्जिकल सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने शुक्रवार को छह जिलों के सदर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और सर्जरी की स्थिति की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में नवादा, किशनगंज, औरंगाबाद, बक्सर, गोपालगंज और जमुई के अस्पतालों की प्रगति पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अस्पतालों में केवल ऑपरेशन की संख्या बढ़ाना लक्ष्य नहीं होना चाहिए। सर्जरी के प्रकारों का दायरा बढ़ाना भी जरूरी है, ताकि अलग-अलग बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जिलों या बड़े अस्पतालों में रेफर न करना पड़े।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की क्षमता का हो बेहतर इस्तेमाल

कुमार रवि ने सिविल सर्जनों से कहा कि अस्पतालों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों, ऑपरेशन थिएटर और अन्य संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जाए। विशेषज्ञ डॉक्टरों को सिर्फ ओपीडी तक सीमित रखने के बजाय उनकी विशेषज्ञता के अनुसार सर्जिकल सेवाओं को भी बढ़ाया जाए।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई सदर अस्पतालों में अभी भी सर्जरी का बड़ा हिस्सा एलएससीएस (LSCS) यानी सीजेरियन सेक्शन से जुड़ा है। ऐसे में सामान्य सर्जरी के साथ-साथ ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग, ईएनटी और अन्य जरूरी सर्जिकल सेवाओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया है।

छह जिलों में अगस्त की सर्जरी का आंकड़ा

अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार इन छह जिलों के सदर अस्पतालों में सर्जरी की स्थिति इस प्रकार रही—

  • नवादा: 224 सर्जरी, 7 प्रकार
  • बक्सर: 80 सर्जरी, 7 प्रकार
  • गोपालगंज: 80 सर्जरी, 6 प्रकार
  • जमुई: 89 सर्जरी, 4 प्रकार
  • किशनगंज: 63 सर्जरी, 4 प्रकार
  • औरंगाबाद: 38 सर्जरी, 5 प्रकार

स्वास्थ्य सचिव ने विशेष रूप से औरंगाबाद, बक्सर और गोपालगंज में पिछले महीनों की तुलना में सर्जरी की संख्या में कमी पर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति में सुधार करने और अस्पतालों की सर्जिकल क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने को कहा।

अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने का निर्देश

बैठक में जिला अस्पतालों से होने वाले अनावश्यक रेफरल को कम करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के कामकाज की नियमित समीक्षा करने और अस्पताल की टीम के रूप में काम करने के निर्देश दिए गए। उद्देश्य यह है कि जिन मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में संभव है, उन्हें केवल आवश्यक होने पर ही उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाए।

तीन महीने में सर्जरी की संख्या में बड़ा इजाफा

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में जून से अगस्त के बीच लगातार बढ़ोतरी हुई है। जून 2026 में कुल 2,428 सर्जरी हुई थीं। जुलाई में यह संख्या बढ़कर 5,650 हो गई, जबकि अगस्त में जिला अस्पतालों में 8,209 सर्जरी दर्ज की गईं।जुलाई के मुकाबले अगस्त में सर्जरी की संख्या में 45.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

वैशाली समेत इन जिलों का बेहतर प्रदर्शन

अगस्त में कुछ जिला अस्पतालों ने सर्जरी के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया। वैशाली जिला अस्पताल में 651, पटना में 587, अररिया में 529, मधेपुरा में 494 और भोजपुर में 362 सर्जरी की गईं।

इसके साथ ही सिर्फ ऑपरेशन की संख्या ही नहीं, बल्कि सर्जरी की विविधता बढ़ाने पर भी काम हुआ है। अगस्त में बेगूसराय में 60 प्रकार, पटना में 53, नालंदा में 42, भोजपुर में 40 और मुजफ्फरपुर में 33 प्रकार की सर्जरी उपलब्ध कराई गईं।

ईएनटी और ऑर्थोपेडिक्स सर्जरी में भी बढ़ोतरी

जुलाई की तुलना में अगस्त में अलग-अलग विशेषज्ञ सेवाओं की सर्जरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार ईएनटी सर्जरी में 471.7 प्रतिशत, ऑर्थोपेडिक्स में 296.2 प्रतिशत, नेत्र रोग से संबंधित सर्जरी में 174.3 प्रतिशत और जनरल सर्जरी में 66.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।स्वास्थ्य विभाग का जोर अब जिला अस्पतालों को ऐसी सुविधाओं से लैस करने पर है, जिससे मरीजों को सामान्य से लेकर विशेषज्ञ सर्जरी तक की सेवाएं अपने जिले में ही मिल सकें।

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