HomeBiharपटना में कांग्रेस का विरोध मार्च: विधानसभा के पास बैरिकेडिंग तोड़ने की...

पटना में कांग्रेस का विरोध मार्च: विधानसभा के पास बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश, वाटर कैनन का इस्तेमाल

लाइव सिटीज, पटना: बिहार में मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को सड़क पर उतर आया। प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर पटना में बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता विरोध मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

आर ब्लॉक से शुरू हुआ मार्च

कांग्रेस का यह मार्च आर ब्लॉक स्थित चाणक्य होटल के पास से शुरू हुआ। पार्टी कार्यकर्ता राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर आगे बढ़े। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और पोस्टर थे। मार्च के दौरान चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए गए।

कांग्रेस की ओर से पहले ही राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया गया था। पार्टी ने जिला और प्रदेश स्तर के कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल होने की अपील की थी।

विधानसभा के पास पुलिस ने रोका

मार्च जब विधानसभा के पास पहुंचा तो प्रशासन ने आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर दी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद कुछ समय तक मौके पर प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही। पुलिस की बैरिकेडिंग के बावजूद कार्यकर्ता आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

कांग्रेस का मुख्य विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग कर रही है।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की स्वतंत्र तरीके से समीक्षा होनी चाहिए। पार्टी ने इसी मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाया है।

चुनाव आयोग की ओर से क्या कहा गया?

वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने सामने आई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद कहा है कि आयोग के फैसले, जिसमें SIR भी शामिल है, तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और फैसले सर्वसम्मति से हुए। इस वजह से कांग्रेस के आरोपों और चुनाव आयोग की ओर से सामने आए स्पष्टीकरण के बीच राजनीतिक विवाद बना हुआ है।

रिपोर्ट में मतभेद का दावा

दरअसल, हाल में एक मीडिया रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित मतभेदों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में अलग-अलग फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कई बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा से जुड़े मामलों से था। हालांकि चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बाद फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।

28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन

कांग्रेस ने विरोध का कार्यक्रम केवल 25 सितंबर तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी की ओर से 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियों को अपने-अपने जिला मुख्यालयों और कलेक्टर कार्यालयों तक मार्च निकालने का कार्यक्रम भी बताया गया है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर उसका आंदोलन जारी रहेगा।

पटना में शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग और वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद यह मुद्दा एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक ओर कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, वहीं चुनाव आयोग की ओर से फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments

freefonnatic1971 on Home