लाइव सिटीज, पटना: शिक्षक और स्नातक की चार-चार सीटों पर 27 अक्टूबर को देर से शुरू हुई मतगणना अब भी जारी है। अब तक चार सीटों के परिणाम आए हैं। परिणाम देश की राष्ट्रीय पार्टियों के लिए सुखद नहीं। भाजपा-कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र संख्या-06 में 11 राउंड की मतगणना के बाद भाजपा के डॉ. एनके यादव 24,258 मतों के साथ आगे चल रहे हैं।
राजद प्रत्याशी नितेश कुमार को 18,918 और जनसुराज के रजनीश रंजन को 15,536 मत मिले हैं। डॉ. एनके यादव ने राजद प्रत्याशी पर 5,340 मतों की बढ़त बना रखी है, जबकि जनसुराज तीसरे स्थान पर है। अब तक 73,487 मतपत्रों की जांच हुई है, जिनमें 64,401 वैध और 9,086 अवैध पाए गए हैं। मतगणना जारी है और अंतिम परिणाम की आधिकारिक घोषणा बाकी है।
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के सातवें राउंड के बाद निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर बृजवासी 1477 मतों से आगे चल रहे हैं। उन्हें अब तक 16,190 वोट मिले हैं। वहीं, एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा 14,713 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। राजद प्रत्याशी रश्मि विनायक गौतम 10,802 मतों के साथ तीसरे स्थान पर हैं, जबकि जन सुराज के डॉ. विमोहन कुमार को 166 वोट मिले हैं। सातवें राउंड की गिनती के बाद बृजवासी और अभिषेक झा के बीच मुकाबला जारी है।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन से जनसुराज के उम्मीदवार डॉ. सुरेश प्रसाद राय को जिला प्रशासन ने देर रात जीत का प्रमाणपत्र सौंपा। जीत के बाद उन्होंने कहा कि वह सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर पिछले नौ वर्षों से शिक्षकों की सेवा के लिए समर्पित हैं और लगातार तीसरी बार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव लड़ रहे थे। इससे पहले दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्हें कम मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार जन सुराज के टिकट पर उन्होंने 324 मतों से जीत हासिल की।
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सर्वेश कुमार 1,417 मतों से आगे चल रहे हैं। उन्हें अब तक कुल 7,371 वोट मिले हैं, जबकि राजद के अनिल कुमार झा 5,954 मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर हैं। सर्वेश कुमार को अनिल कुमार झा पर 1,417 मतों की बढ़त हासिल है।
पटना की शिक्षक सीट पर राजद के डॉ. संजीव ने जीत हासिल कर ली है। यह सीट भाजपा के डॉ. नवल किशोर यादव के पास थी। वह जीत के प्रति आश्वस्त थे। डॉ. संजीव पहले जदयू में थे। 2024 के विश्वास मत प्रकरण के आसपास वह पार्टी से दूर हुए और लगातार हमलावर रहने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने अपनी परबत्ता सीट से विधानसभा में राजद के टिकट पर भाग्य आजमाया, लेकिन नाकाम रहे। अब विधान परिषद् चुनाव में उन्होंने टिकट हासिल किया और इस बार भाजपा की यह पुरानी सीट छीन ली।
