लाइव सिटीज, पटना: बिहार में फैटी लिवर की बढ़ती समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर जांच और जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की है। ‘स्वस्थ लिवर-स्वस्थ बिहार’ अभियान के तहत अगले 18 महीनों में राज्य के सभी 38 जिलों में करीब 26 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस अभियान में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य फैटी लिवर की समय रहते पहचान करना, लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद मरीजों को उचित चिकित्सकीय सलाह एवं उपचार उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयार की जा रही इस योजना को लागू करने में नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) का तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। सोमवार को पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अभियान की रूपरेखा और इसके क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ILBS के निदेशक एवं चांसलर डॉ. एसके सरीन भी बैठक में शामिल हुए।
सभी जिलों तक पहुंचेगी जांच की सुविधा
स्वास्थ्य विभाग इस अभियान को राज्यव्यापी स्तर पर लागू करेगा। इसके तहत शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को जांच और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। अभियान को पहले से संचालित गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NCD Programme) और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जोड़ा जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि लोगों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़े। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से शुरुआती स्तर पर जांच कर जोखिम वाले लोगों की पहचान की जा सके।
आशा, एएनएम और जीविका दीदियों की होगी अहम भूमिका
अभियान को घर-घर तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अपने जमीनी नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा। इसमें आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और जीविका दीदियों को शामिल किया जाएगा।
ये सभी कर्मी लोगों को फैटी लिवर के लक्षणों, इसके संभावित खतरों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करेंगे। साथ ही लोगों को स्क्रीनिंग के लिए प्रेरित करने और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में भी मदद करेंगे।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इस व्यवस्था से उन लोगों तक पहुंचने में सहायता मिलेगी, जो जागरूकता की कमी या स्वास्थ्य केंद्रों से दूरी के कारण नियमित जांच नहीं करा पाते हैं।
25 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
26 लाख लोगों की स्क्रीनिंग के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़े पैमाने पर स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत करीब 25 हजार डॉक्टरों, नर्सों और लैब तकनीशियनों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए 150 मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर अलग-अलग जिलों में स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान फैटी लिवर की पहचान, स्क्रीनिंग की प्रक्रिया, जोखिम वाले मरीजों की पहचान और उन्हें आगे की चिकित्सकीय जांच के लिए भेजने से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
जिलाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक करेंगे निगरानी
अभियान को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए तीन स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था बनाई जाएगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी इसकी प्रगति पर नजर रखेंगे। प्रमंडल स्तर पर प्रमंडलीय आयुक्त समीक्षा करेंगे, जबकि राज्य स्तर पर स्वास्थ्य मंत्री अभियान की निगरानी करेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। उन्होंने समय पर बीमारी की पहचान और बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।
फैटी लिवर से बढ़ सकता है दूसरी बीमारियों का खतरा
फैटी लिवर ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआती अवस्था में कई लोगों को इसके स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। ऐसे में बिना जांच के बीमारी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मेटाबॉलिक गड़बड़ी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। समय पर ध्यान नहीं देने और बीमारी के बढ़ने पर कुछ मरीजों में लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और गंभीर अवस्था में सिरोसिस जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि शुरुआती स्तर पर फैटी लिवर की पहचान और जीवनशैली में सुधार से बीमारी को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है। इसके लिए संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और वजन पर नियंत्रण जरूरी है।
बिहार में पहले से चल रहा है बड़ा स्वास्थ्य जांच अभियान
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने इससे पहले 2 सितंबर 2026 को ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में इस अभियान का शुभारंभ करते हुए सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथ रवाना किए थे।
उस अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग और करीब छह करोड़ नागरिकों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें मधुमेह, ब्लड प्रेशर, कैंसर, हृदय रोग, सांस एवं फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के साथ फैटी लिवर की जांच भी शामिल है।
अब ‘स्वस्थ लिवर-स्वस्थ बिहार’ अभियान के जरिए फैटी लिवर की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे राज्य में लिवर संबंधी बीमारियों की शुरुआती पहचान और रोकथाम के प्रयासों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव कौशलेंद्र कुमार समेत स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
