लाइव सिटीज, पटना: बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सटीक और अपडेट करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत राज्य की करीब 90 लाख जमाबंदियों की जांच कर उनमें मौजूद गलतियों को सुधारा जाएगा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को इस काम को मिशन मोड में पूरा करने का निर्देश दिया है। अभियान की अंतिम समय सीमा 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
मूल रिकॉर्ड से मिलाकर जांची जाएगी डिजिटल जमाबंदी
मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऑनलाइन या डिजिटाइज्ड जमाबंदी में दर्ज विवरण को पुराने मूल जमाबंदी पंजी की स्कैन प्रति से मिलाया जाए। जहां दोनों रिकॉर्ड में अंतर मिले, वहां नियमानुसार सुधार किया जाएगा।
जांच के दौरान खास तौर पर इन जानकारियों को देखा जाएगा—
- रैयत यानी जमीन मालिक का नाम
- पिता या अभिभावक का नाम
- खाता संख्या
- खेसरा संख्या
- जमीन का रकबा
- लगान से संबंधित विवरण
- अन्य जरूरी भू-अभिलेखीय जानकारी
- शून्य रकबा दर्ज होने के मामले
- शून्य लगान वाले रिकॉर्ड
- जमाबंदी में छूटी हुई यानी मिसिंग जानकारी
अगर इनमें से कोई जानकारी मूल रिकॉर्ड से अलग मिलती है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत ठीक किया जाएगा।
मृत जमाबंदीदारों के रिकॉर्ड भी होंगे अपडेट
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसे जमीन मालिकों की जमाबंदी को अपडेट करना है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन रिकॉर्ड अभी भी उनके नाम पर चल रहा है।
ऐसे मामलों में वैध उत्तराधिकारियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार उत्तराधिकार नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर जमाबंदी को संबंधित वारिसों के नाम पर अपडेट किया जाएगा। इसके लिए राजस्व कर्मचारियों की ओर से वंशावली तैयार करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
31 अक्टूबर तक पूरा करना होगा अभियान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का यह विशेष अभियान 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक चल रहा है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने को कहा है। राज्य में करीब साढ़े चार करोड़ जमाबंदियां हैं और इनमें लगभग 90 लाख रिकॉर्ड में किसी न किसी प्रकार की त्रुटि चिन्हित की गई है।
हर दिन होगी प्रगति की निगरानी
अभियान सिर्फ रिकॉर्ड सुधार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
अंचल अधिकारी प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अपर समाहर्ता को भेजेंगे। जिले में अपर समाहर्ता नोडल पदाधिकारी की भूमिका में रहेंगे, जबकि समाहर्ता अभियान की नियमित समीक्षा करेंगे। विभागीय स्तर पर भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रगति की निगरानी की जाएगी।
रिकॉर्ड की गुणवत्ता की भी होगी जांच
जमाबंदी में सुधार का काम सिर्फ ऑनलाइन आंकड़ों को बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। अधिकारियों के काम की गुणवत्ता जांचने के लिए अलग से रैंडम वेरिफिकेशन की व्यवस्था की गई है।
निर्देश के अनुसार—
- भूमि सुधार उप-समाहर्ता प्रत्येक अंचल के 5 प्रतिशत मामलों की जांच करेंगे।
- अपर समाहर्ता 2 प्रतिशत मामलों का रैंडम सत्यापन करेंगे।
- समाहर्ता 1 प्रतिशत मामलों की जांच करेंगे।
इससे यह देखा जा सकेगा कि रिकॉर्ड में किया गया सुधार मूल दस्तावेजों के आधार पर सही तरीके से हुआ है या नहीं।
सरकारी जमीन का भी होगा स्थलीय सत्यापन
अभियान में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड को भी शामिल किया गया है। क्षेत्रीय सत्यापन के दौरान सरकारी भूमि के डेटाबेस में दर्ज पांच एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली जमीन का स्थलीय सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए मौजावार सूची तैयार कर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराने का निर्देश है।
सही जमाबंदी क्यों जरूरी है?
जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता, खेसरा या रकबा जैसी जानकारी गलत होने पर लोगों को कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जमाबंदी और वास्तविक दस्तावेजों में अंतर होने से जमीन की खरीद-बिक्री, निबंधन, दाखिल-खारिज और बैंक से जमीन के आधार पर ऋण लेने जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कत आ सकती है।
सरकार का लक्ष्य रिकॉर्ड को दुरुस्त करके आगे होने वाले भूमि विवादों और दस्तावेजी परेशानियों को कम करना भी है। सही और अपडेट जमाबंदी से जमीन के सर्वे और अन्य भू-अभिलेखीय प्रक्रियाओं में भी मदद मिलेगी।
जमीन मालिकों के लिए क्या मायने रखता है?
अगर किसी व्यक्ति की ऑनलाइन जमाबंदी में नाम, पिता का नाम, खाता, खेसरा, रकबा या लगान से जुड़ी जानकारी गलत है, तो उसे रिकॉर्ड की जांच करानी चाहिए। बिहार सरकार के ऑनलाइन जमाबंदी पोर्टल पर जमाबंदी को नाम, प्लॉट नंबर, खाता नंबर और जमाबंदी संख्या से देखा जा सकता है। पोर्टल के अनुसार ऑनलाइन जमाबंदी में त्रुटि दिखाई देने पर सुधार के लिए संबंधित ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस अभियान के पूरा होने के बाद बड़ी संख्या में पुराने और त्रुटिपूर्ण भू-अभिलेखों को अपडेट करने का लक्ष्य है, जिससे जमीन के रिकॉर्ड में एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
