लाइव सिटीज, पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब शिक्षक स्कूल परिसर में अपनी मर्जी से रील्स नहीं बना सकेंगे और न ही कक्षा में पढ़ाई के दौरान बच्चों के साथ वीडियो शूट कर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित अधिकारी से पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों को सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का मंच नहीं बनाया जा सकता।
शिक्षा विभाग का यह फैसला बच्चों की निजता, पढ़ाई की गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। विभाग का मानना है कि स्कूल में शिक्षण कार्य के दौरान रील्स बनाने और वीडियो शूट करने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही, बिना अनुमति बच्चों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करना उनके मौलिक अधिकारों और निजता के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
बच्चों के साथ रील बनाने पर विभाग को आपत्ति
शिक्षा विभाग ने विशेष रूप से उन गतिविधियों पर चिंता जताई है, जिनमें शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय बच्चों के साथ रील्स बनाते हैं और फिर उन्हें इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हैं।विभाग का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के दौरान इस तरह की गतिविधियां किसी भी स्थिति में उचित नहीं हैं। इससे विद्यार्थियों की निजता प्रभावित होती है। कई बार बच्चों की तस्वीरें और वीडियो उनकी सहमति या अभिभावकों की जानकारी के बिना सोशल मीडिया पर साझा कर दिए जाते हैं।
विभाग ने इसे बच्चों के निजता और जीवन के मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना है। शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व बच्चों को पढ़ाना और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान देना है, न कि कक्षा के अंदर सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करना।
स्कूल में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने पर भी रोक
शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने की प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई है।विभाग के अनुसार, कुछ शिक्षक स्कूल परिसर और कक्षाओं में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते हैं। इससे सरकारी कार्य प्रभावित होता है और शिक्षण व्यवस्था की गंभीरता भी कम होती है।शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल का वातावरण पूरी तरह पढ़ाई और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए। शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन प्राथमिकता के आधार पर करना होगा।
राजनीतिक और धार्मिक प्रचार वाले पोस्ट पर भी पाबंदी
शिक्षा विभाग ने बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 और बिहार सरकारी सेवक आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 का भी उल्लेख किया है।इन नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक, धार्मिक, जाति या उपजाति आधारित प्रचार अभियान चलाने की अनुमति नहीं है
सरकारी सेवकों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय अपने पद और सेवा नियमों की मर्यादा बनाए रखनी होगी। नियमों के विरुद्ध किसी तरह का प्रचार या गतिविधि सामने आने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
