लाइव सिटीज, पटना: बिहार के 390 सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का वेतन रोक दिया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने संबंधित स्कूलों से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी अनियमितताओं के सामने आने के बाद की गई है।
शिक्षा विभाग के निर्देश पर जिले के सरकारी स्कूलों की निगरानी और निरीक्षण किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, समय पर विद्यालय नहीं खुलने, छात्रों की कम उपस्थिति, मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में लापरवाही और स्कूल से संबंधित अभिलेखों के रखरखाव में कमी जैसी शिकायतें सामने आईं। कुछ विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
DEO की ओर से जारी निर्देश में संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इसमें वेतन रोकने की अवधि बढ़ाना, अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा नियमों के तहत अन्य दंड शामिल हो सकते हैं।
विभाग ने स्कूलों से उपस्थिति पंजी, निरीक्षण पंजी, नामांकन से संबंधित रिकॉर्ड, मध्याह्न भोजन योजना के दस्तावेज और अन्य आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। अधिकारियों के अनुसार, जवाब मिलने के बाद प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों को विद्यालय संचालन में पारदर्शिता बरतने, समय-सारिणी के अनुसार कक्षाएं संचालित करने और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
वेतन रोके जाने की कार्रवाई से शिक्षकों में नाराजगी भी देखी जा रही है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि कई मामलों में निरीक्षण के दौरान वास्तविक स्थिति को पूरी तरह दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने विभाग से निष्पक्ष जांच और जवाब देने के लिए पर्याप्त अवसर देने की मांग की है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने कहा है कि सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, 24 घंटे की समय-सीमा में स्पष्टीकरण नहीं देने वाले स्कूलों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वे स्कूलों की नियमित निगरानी करें और रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराएं।
