लाइव सिटीज, पटना: बिहार में शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू होने के साथ ही विवाहित महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया गया है। अब बिहार की आरक्षण व्यवस्था का लाभ लेने वाली विवाहित महिला उम्मीदवारों को अपने पति के स्थायी पते के आधार पर नहीं, बल्कि पिता के स्थायी पते से जारी आवश्यक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे।
इसका सीधा मतलब यह है कि किसी महिला की शादी बिहार में हुई है या उसका पति बिहार का स्थायी निवासी है, केवल इस आधार पर उसे बिहार की आरक्षण सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा। आरक्षण का दावा करने के लिए संबंधित महिला को अपने पैतृक यानी पिता के स्थायी पते से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
पिता के पते से देने होंगे प्रमाण-पत्र
नियम के मुताबिक आरक्षण का लाभ लेने वाली विवाहित महिला उम्मीदवारों को अपने पिता के स्थायी पते के आधार पर जारी जाति प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र और नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) प्रमाण-पत्र देना होगा। इन दस्तावेजों के जरिए यह निर्धारित किया जाएगा कि उम्मीदवार बिहार की आरक्षण व्यवस्था के तहत लाभ लेने की पात्रता रखती है या नहीं।
यानी शादी के बाद महिला का पता बदल जाने या पति के पते पर रहने से उसके आरक्षण संबंधी दावे का आधार नहीं बदलेगा। आरक्षण के लिए उसके मायके यानी पिता के स्थायी पते और उससे जुड़े प्रमाण-पत्रों को आधार माना जाएगा।
सिर्फ बिहार में शादी होने से नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ
इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बिहार में शादी होना अपने आप में आरक्षण का आधार नहीं होगा। अगर कोई महिला दूसरे राज्य की निवासी है और उसकी शादी बिहार के किसी व्यक्ति से हुई है, तो केवल विवाह के आधार पर वह बिहार की आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने की हकदार नहीं हो जाएगी।
इसी तरह शिक्षक भर्ती में आरक्षण का दावा करते समय महिला उम्मीदवार को निर्धारित दस्तावेजों के जरिए अपनी पात्रता साबित करनी होगी। इससे भर्ती प्रक्रिया में यह स्पष्ट रहेगा कि आरक्षण का लाभ किन उम्मीदवारों को बिहार की निर्धारित शर्तों के आधार पर दिया जाना है।
शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति का असर
बिहार में शिक्षक नियुक्ति में डोमिसाइल नीति लागू किए जाने का उद्देश्य राज्य के पात्र अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ देना है। इसी क्रम में विवाहित महिला अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है, ताकि शादी के बाद बदले पते को लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे।
अब विवाहित महिला उम्मीदवारों को शिक्षक भर्ती में आवेदन या दस्तावेज सत्यापन के दौरान यह ध्यान रखना होगा कि यदि वे आरक्षण का लाभ मांग रही हैं तो उनके जाति, निवास और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र पिता के स्थायी पते के आधार पर निर्धारित नियमों के अनुरूप होने चाहिए।इस नियम के चलते दूसरे राज्य की ऐसी महिलाएं, जिनकी शादी बिहार में हुई है, केवल पति के बिहार निवासी होने के आधार पर राज्य की आरक्षण सुविधाओं का दावा नहीं कर सकेंगी।
