लाइव सिटीज, गोपालगंज: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हुई भारी बारिश और वाल्मीकिनगर गंडक बराज से छोड़े गए बड़े जलप्रवाह का असर अब गोपालगंज में साफ दिखाई दे रहा है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सदर प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। करीब सात गांव बाढ़ की चपेट में हैं और लगभग 1900 परिवार प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्रशासन प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटा है।
सिंहोरवा के पास सारण मुख्य बांध में रिसाव
बाढ़ के बीच गोपालगंज सदर प्रखंड के सिंहोरवा गांव के समीप सारण मुख्य बांध पर भी खतरा बढ़ गया है। यहां बांध में बने रैट होल के कारण पानी का रिसाव तेज होने की सूचना सामने आई है। जानकारी मिलते ही गंडक विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रिसाव को नियंत्रित करने का काम शुरू किया। विभाग की ओर से प्रभावित हिस्से पर जियो बैग लगाए जा रहे हैं और लगातार निगरानी की जा रही है।
बांध के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में इसे लेकर चिंता है। लगातार बढ़ते नदी के दबाव और आसपास फैल रहे पानी के कारण लोगों को बांध की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
सात गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी
गंडक के बढ़े जलस्तर से सदर प्रखंड के करीब सात गांवों में पानी फैल चुका है। लगभग 1900 परिवार प्रभावित बताए गए हैं। कई परिवारों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए तिरपाल उपलब्ध कराया गया है और भोजन की व्यवस्था के लिए सामुदायिक रसोई भी शुरू की गई है।
बाढ़ के कारण ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी परेशानी घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित रखने, खाने-पीने की व्यवस्था करने और बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की है। निचले इलाकों में पानी बढ़ने से खेत और ग्रामीण रास्ते भी प्रभावित हुए हैं।
निमुईया में कटाव, गौसिया स्कूल में घुसा पानी
गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर मांझागढ़ प्रखंड में भी दिखाई दे रहा है। निमुईया पंचायत के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय के आसपास कटाव की सूचना के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। फिलहाल गांव के घरों में पानी पहुंचने की बात सामने नहीं आई है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा गया है।
वहीं गौसिया पंचायत के राजकीय बुनियादी विद्यालय में भी बाढ़ का पानी धीरे-धीरे पहुंचने लगा है। इससे आसपास के लोगों में दोबारा बाढ़ की आशंका को लेकर डर बढ़ गया है और कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
बराज से भारी पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा संकट
गंडक में अचानक बढ़े जलप्रवाह की बड़ी वजह नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश है। 28 सितंबर को सुबह वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। बराज पर करीब 13 घंटे तक जलप्रवाह पांच लाख क्यूसेक से अधिक और करीब 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक रहा। इसका असर गंडक के निचले इलाकों में पड़ा।
गोपालगंज में स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने 28 सितंबर को डुमरिया घाट और आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया था। डुमरिया घाट के पास गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बताया गया था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तटबंधों की लगातार निगरानी, नाइट पेट्रोलिंग और राहत शिविरों व सामुदायिक रसोई के जरिए प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया था।
तटबंध टूटने की घटना कहां हुई?
इस बीच एक जरूरी अंतर समझना भी जरूरी है। गोपालगंज में सारण मुख्य बांध में रिसाव की सूचना है, जबकि गंडक नदी के तटबंध टूटने की पुष्टि पश्चिम चंपारण के बगहा में हुई है। बगहा-1 के खैरटवा के पास चंपारण तटबंध का हिस्सा गंडक के भारी दबाव में क्षतिग्रस्त हुआ और पानी आसपास के निचले इलाकों की ओर फैलने लगा। बैरिया के फुलियाखांड़ के पास भी तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है।
इसलिए गोपालगंज की खबर में ‘गंडक का तटबंध टूट गया’ लिखने के बजाय फिलहाल ‘गंडक के बढ़े जलस्तर से सात गांवों में बाढ़, सारण मुख्य बांध में रिसाव’ लिखना उपलब्ध आधिकारिक और ताजा जानकारी के मुताबिक अधिक सटीक रहेगा।
