लाइव सिटीज, पटना: पितृपक्ष मेले में इस बार परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी देखने को मिल रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए प्रशासन की ओर से QR कोड, AI, CCTV, डिजिटल हेल्प डेस्क और ऑनलाइन सेवाओं जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं की गई हैं।
पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने मेले में भीड़ प्रबंधन से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक कई स्तरों पर तकनीक का इस्तेमाल किया है।
QR कोड से बिछड़े बच्चों और बुजुर्गों की पहचान
मेला क्षेत्र में बच्चों और बुजुर्गों को परिजनों से बिछड़ने से बचाने के लिए QR कोड वाले कलाई बैंड दिए जा रहे हैं। इन बैंड में परिजनों का मोबाइल नंबर और जरूरी जानकारी दर्ज रहेगी।अगर कोई बच्चा या बुजुर्ग भीड़ में अपने परिवार से बिछड़ जाता है, तो QR कोड के जरिए परिजनों से संपर्क करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही संबंधित मोबाइल नंबर पर अलर्ट मैसेज भेजे जाने की व्यवस्था भी की गई है।
भाषा की समस्या दूर करने के लिए डिजिटल सिस्टम
पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। भाषा की बाधा को दूर करने के लिए मेला क्षेत्र के हेल्प डेस्क पर Google Translator और भाषा आधारित डिजिटल सिस्टम उपलब्ध कराया गया है।
इसके जरिए श्रद्धालु अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, अलग-अलग भाषाओं में कही गई बात को कर्मचारी हिंदी में समझ सकेंगे और हिंदी में दिए गए जवाब को श्रद्धालु अपनी भाषा में सुन सकेंगे।
543 से ज्यादा CCTV और AI से निगरानी
मेले में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए AI तकनीक के साथ 543 से अधिक CCTV कैमरों से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने या कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति बनने पर अधिकारियों को लोकेशन के साथ अलर्ट मिलने की व्यवस्था की गई है।
इससे भीड़ को नियंत्रित करने और किसी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
घर बैठे पिंडदान की तैयारी
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ‘पिंडदान गया जी’ ऐप और वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। श्रद्धालु घर बैठे पिंडदान से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के साथ वेदियों, टेंट सिटी, होटल-धर्मशाला, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देख सकते हैं।
इसके अलावा शौचालय, पेयजल केंद्र, स्वास्थ्य शिविर और पुलिस कैंप की लोकेशन भी डिजिटल माध्यम से देखी जा सकती है। डिजिटल खोया-पाया सुविधा के जरिए लापता व्यक्ति की सूचना दर्ज कराने और संबंधित जानकारी हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
