लाइव सिटीज, पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी और मारपीट के मामले में कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री ने परिवार को भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से जल्द न्याय दिलाने की बात कही गई है।
पीड़िता के परिवार से मिले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री की मुलाकात के दौरान पीड़ित परिवार ने घटना से जुड़ी अपनी परेशानियां और सुरक्षा को लेकर चिंता सामने रखी। परिवार की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी सुरक्षा और न्याय दोनों को लेकर गंभीर है। सरकार की प्राथमिकता आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना है।
मुलाकात के बाद सीएम ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची एवं उनके परिवार से मुलाकात की। बेटी को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाया। परिवार ने भी पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया.” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मामले के सभी दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए एक महीने के भीतर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही जमुई मामले को लेकर स्पष्ट कर चुके हैं कि अपराधी की पहचान किसी जाति या धर्म से नहीं, बल्कि उसके अपराध से होती है। उन्होंने कानून-व्यवस्था और सुशासन को अपनी प्राथमिकता बताया था।
15 से 20 दिनों में स्पीडी ट्रायल की तैयारी
मामले में पुलिस और जिला प्रशासन ने अब न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जमुई के जिलाधिकारी नवीन और एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का लक्ष्य 15 से 20 दिनों के भीतर रखा गया है।
इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए डीएसपी दीप्ति मोनाली और डीडीसी शिप्रा चौधरी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्रशासन का उद्देश्य जांच और अभियोजन से जुड़ी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार मामले के मुख्य आरोपितों में शामिल नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि नंदन यादव की गिरफ्तारी के दौरान फायरिंग की स्थिति बनी थी, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। हरेराम यादव को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक मामले में अब तक कुल पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। वहीं एक अन्य व्यक्ति की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस जांच में वीडियो समेत दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया जा रहा है।
वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई
जमुई की घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वीडियो और अन्य सामग्री प्रसारित हुई। पुलिस ने इस मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को लेकर भी कार्रवाई शुरू की है।
एसपी के अनुसार पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने से जुड़े मामले में साइबर थाना में अलग केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा एआई की मदद से तैयार किए गए कथित फर्जी वीडियो और घटना को गलत तरीके से पेश करने वाली सामग्री की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने ऐसे मामलों में करीब 225 लोगों को चिन्हित किए जाने की जानकारी दी है और संबंधित लोगों को नोटिस भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।
मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुआ पीड़िता का बयान
मामले में गुरुवार को पीड़िता को कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष पॉक्सो अदालत में पेश किया गया। इसके बाद न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष बंद कमरे में उसका बयान दर्ज कराया गया। यह बयान कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पीड़िता को बाद में सदर अस्पताल भी ले जाया गया, जहां उसका पंजीकरण कराया गया। हालांकि मेडिकल जांच पूरी होने को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है।
पीड़िता की पहचान उजागर नहीं करने की अपील
प्रशासन ने सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि पीड़िता की पहचान से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी, फोटो या वीडियो साझा न करें। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि घटना को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट वीडियो और एआई से तैयार सामग्री पर भरोसा नहीं किया जाए।
मामले में पुलिस की कार्रवाई अब दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है—एक तरफ आरोपियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता की पहचान उजागर करने तथा फर्जी या भ्रामक सामग्री फैलाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।
