लाइव सिटीज, पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी और उसका वीडियो बनाए जाने के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस घटना को लेकर बिहार सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका मुख्य सवाल यह है कि अगर घटना का वीडियो आरोपितों की ओर से बनाकर सोशल मीडिया पर नहीं डाला जाता और वह वायरल नहीं होता, तो पुलिस-प्रशासन को इस घटना की जानकारी कब मिलती?
‘वीडियो नहीं चलता तो समाज को पता कैसे चलता?’
प्रशांत किशोर ने सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि वीडियो शेयर करने वालों पर कार्रवाई की बात हो रही है, लेकिन घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर भी उतना ही जोर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोपितों ने घटना का वीडियो बनाकर खुद जारी नहीं किया होता तो आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिलती।
पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वीडियो प्रसारित ही नहीं होता तो घटना की जानकारी समाज तक पहुंचती कैसे।
‘सरकार के डर का माहौल खत्म हो गया’
प्रशांत किशोर ने घटना को लेकर यह भी आरोप लगाया कि समाज में अपराधियों के बीच कानून का डर कम हुआ है। उन्होंने जमुई की घटना को सामाजिक और नैतिक पुलिसिंग के नाम पर युवकों द्वारा की गई कथित ज्यादती से जोड़ते हुए सरकार से कानून-व्यवस्था पर जवाब मांगा। उनके बयान के मुताबिक, घटना के कई दिन बाद तक पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी और वीडियो सामने आने के बाद मामला व्यापक रूप से सामने आया।
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ पर भी तंज
प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का जिक्र करते हुए सरकार पर राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बीच अब लोगों को अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर खुद चिंतित होना पड़ रहा है। उनका यह बयान सरकार की महिला सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा राजनीतिक हमला था।
