लाइव सिटीज, पटना: बिहार सरकार ने सुनहरे बालू के काले कारोबार पर नकेल कस दी है. अब इसके सकारात्मक नतीजे भी दिखने लगे हैं. राज्य सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में बालू खनन से प्राप्त होने वाले राजस्व की वसूली में एक नया कीर्तिमान बनाया है. विगत वित्तीय वर्ष यानी 2024-25 के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्य से करीब 14 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है.
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए विभाग ने कुल 3500 करोड़ रुपये के राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया था. जबकि इसके विरुद्ध विभाग ने कुल 3569 करोड़ रुपये के राजस्व की वसूली की है. उन्होंने कहा कि अब राज्य में पीले और सफेद बालू का अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि यह राशि विभाग द्वारा निर्धारित राजस्व लक्ष्य से 14 प्रतिशत अधिक है, जो पिछले पांच वर्षों में एक नया रिकॉर्ड है. विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि यह तब संभव हो सका है, जब बिहार सरकार ने पिछले साल अक्टूबर 2024 में राज्य में नई खनन नीति लागू की है, जिससे राज्य में न केवल बालू के अवैध उत्खनन पर रोक लगी है बल्कि बालू की अवैध ढुलाई और परिवहन पर भी लगाम कसा है
इस संवाददाता सम्मेलन में खान एवं भूतत्व विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल और विभाग के निदेशक विनोद दूहन भी मौजूद थे. उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राजस्व वसूली का यह लक्ष्य तब संभव हो सका है, जब बालू खनन में शामिल 25 प्रतिशत से भी अधिक संवेदकों ने अपने-अपने घाट सरकार को सरेंडर कर दिए थे. ऐसे बालू घाटों से बालू का खनन नहीं हो सका है.
उन्होंने स्वीकार किया कि पर्यावरण के सख्त कानून की जटिलताओं के कारण भी कई बालू घाटों से बालू का खनन नहीं हो सका. इसके अलावा सड़कों पर नो इंट्री और जाम के कारण भी की कई समस्याएं आयीं हैं. खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यह भी दावा किया कि नई खनन नीति के कारण बालू घाटों पर रोज होने वाली गोलीबारी और हिंसा की घटनाओं पर भी विराम लगा है. साथ ही बालू की ओवरलोडिंग पर विराम लगने से राज्य की सड़कों और पुल-पुलियों की स्थिति भी सुधरी है.