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चलती ट्रेन से फेंके गए कैलाश की मौत में बड़ी लापरवाही, दो रेल पुलिसकर्मी निलंबित

लाइव सिटीज, पटना: पटना में चलती ट्रेन से युवक को फेंके जाने के बाद हुई कैलाश कुमार की मौत के मामले में अब रेल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। मामले में दानापुर रेल थाना पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि रेलवे ट्रैक से बरामद अज्ञात युवक के शव को पहचान और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना ही करीब 24 घंटे के अंदर अंतिम संस्कार करा दिया गया था।

नेऊरा-सदीसोपुर के बीच मिला था अज्ञात शव

जानकारी के मुताबिक, 7 सितंबर की सुबह नेऊरा और सदीसोपुर के बीच रेलवे ट्रैक से एक अज्ञात युवक का शव बरामद किया गया था। पुलिस ने इस संबंध में यूडी केस दर्ज किया था। ऐसे मामलों में शव की पहचान के लिए निर्धारित अवधि तक उसे सुरक्षित रखने और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान है।लेकिन आरोप है कि इस मामले में शव को पहचान के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही अंतिम संस्कार करा दिया गया। बाद में कैलाश के परिजनों ने तस्वीर के आधार पर शव की पहचान कैलाश कुमार के रूप में की।

72 घंटे की प्रक्रिया नहीं हुई पूरी

मामले की जांच के बाद पटना के रेल एसपी आनंद कुमार राय ने दानापुर रेल थाना में तैनात दारोगा राजेश कुमार और सिपाही अविनाश कुमार को निलंबित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी पहचान के लिए निर्धारित 72 घंटे की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ

ट्रेन में चार लोगों ने खुद को बताया था STF अधिकारी

कैलाश की मौत का मूल मामला भी काफी गंभीर है। जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर की रात कैलाश कुमार अपने दोस्त रितेश कुमार के साथ बक्सर से पटना लौट रहा था। ट्रेन की विकलांग बोगी में चार लोग पहुंचे और खुद को STF अधिकारी बताया।आरोप है कि इन लोगों ने कैलाश और रितेश के साथ मारपीट की और लूटपाट की। विरोध करने पर कैलाश के हाथ-पैर उसकी शर्ट से बांध दिए गए और उसे चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया। इस घटना में कैलाश की मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त रितेश घायल हुआ

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