लाइव सिटीज, पटना: बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. राज्य के 211 नवसृजित डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है। कुल 2451 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 1980 अभ्यर्थी बिहार के निवासी हैं. यानी चयनित उम्मीदवारों में करीब 80.78 प्रतिशत बिहार से हैं.
यह नियुक्ति राज्य के नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इन कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है.
आयोग ने बिहार में लागू आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है. अध्यक्ष के मुताबिक पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कुल 60 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं. इन आरक्षित सीटों का लाभ केवल बिहार के निवासी अभ्यर्थियों को मिलता है.
आयोग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता से जुड़े तीन मामलों पर भी सफाई दी है. आयोग के अनुसार राजेश कुमार यादव का योगदान आरक्षण श्रेणी से संबंधित गलत प्रमाण-पत्र सामने आने के बाद स्वीकार नहीं किया गया. वहीं हिंदी विषय की चयनित अभ्यर्थी हेमा कुमारी का योगदान भी दस्तावेज सत्यापन के दौरान अस्वीकार कर दिया गया.
वहीं, अर्थशास्त्र विषय में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में मेरिट के आधार पर 16 महिला अभ्यर्थियों के चयन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई. आयोग ने कहा कि सभी 16 अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर मेधा सूची में शामिल किया गया है. अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी अभ्यर्थी द्वारा गलत सूचना या दस्तावेज देने की पुष्टि होने पर उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द कर दी जाएगी.
