लाइव सिटीज, पटना: बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में विजयादशमी के अवसर पर इस बार भी भव्य रावण दहन समारोह आयोजित किया जाएगा। 20 अक्टूबर को होने वाले इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 90 फीट ऊंचा रावण का पुतला होगा। इसके साथ ही कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों का भी दहन किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस बार पुतलों को बारिश से सुरक्षित रखने के लिए उनके निर्माण में स्टील पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रावण 90 फीट, कुंभकर्ण 85 और मेघनाद 80 फीट का होगा
गांधी मैदान में आयोजित होने वाला दशहरा समारोह पटना की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। इस वर्ष रावण का पुतला 90 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। वहीं, कुंभकर्ण का पुतला 85 फीट और मेघनाद का पुतला 80 फीट ऊंचा होगा। तीनों पुतलों के दहन के दौरान मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है।
आयोजकों का प्रयास है कि इस बार पुतलों की भव्यता के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को भी बेहतर बनाया जाए। पुतलों को आकर्षक रूप देने के लिए कारीगर लगातार काम कर रहे हैं।
बारिश से बचाने के लिए स्टील पाइप का इस्तेमाल
पिछले साल गांधी मैदान में रावण दहन के दौरान बारिश के कारण पुतले को नुकसान पहुंचने की घटना सामने आई थी। मौसम की मार से रावण के पुतले का सिर भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पुतलों के निर्माण में विशेष सावधानी बरती जा रही है।
बारिश के कारण पुतलों की संरचना कमजोर न हो और उन्हें मजबूती के साथ खड़ा रखा जा सके, इसके लिए स्टील पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुतलों के निर्माण की जिम्मेदारी आगरा के कारीगरों को दी गई है। तकनीकी मजबूती पर ध्यान देने का उद्देश्य यह है कि मौसम खराब होने की स्थिति में भी आयोजन की तैयारियों पर कम से कम असर पड़े।
आगरा के कारीगर तैयार कर रहे हैं पुतले
गांधी मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को तैयार करने के लिए आगरा की टीम जुटी है। विशाल आकार के कारण इन पुतलों के निर्माण में विशेष तकनीक और सावधानी की जरूरत होती है। पुतलों की बनावट, उनकी मजबूती और दहन के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है।
आयोजकों के सामने चुनौती यह भी है कि इतने बड़े पुतलों को निर्धारित स्थान पर सुरक्षित तरीके से खड़ा किया जाए और कार्यक्रम के दौरान दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित रहे।
आधे घंटे तक होगी इको-फ्रेंडली आतिशबाजी
रावण दहन के बाद गांधी मैदान में करीब आधे घंटे तक आतिशबाजी की व्यवस्था की गई है। इस दौरान इको-फ्रेंडली पटाखों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्सव की भव्यता बनाए रखने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने का प्रयास करना है।
आतिशबाजी दशहरा समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहती है। विशाल पुतलों के दहन के बाद रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान पहुंचते हैं।
71 साल पुरानी परंपरा रहेगी जारी
पटना के गांधी मैदान में रावण दहन का आयोजन लंबे समय से होता आ रहा है। इस वर्ष 71वें श्री रामलीला महोत्सव के तहत कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। रामलीला, धार्मिक प्रस्तुतियों और रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।
इस बार 90 फीट के रावण के साथ 85 फीट के कुंभकर्ण और 80 फीट के मेघनाद के पुतलों का दहन कार्यक्रम को खास बनाएगा। बारिश से बचाव के लिए स्टील पाइप के इस्तेमाल और पर्यावरण के अनुकूल आतिशबाजी की व्यवस्था के बीच आयोजकों की कोशिश है कि विजयादशमी का यह आयोजन भव्य और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।
