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MLC बनने पर वेतन का एक भी रुपया खुद पर खर्च नहीं करेंगे अभिषेक झा, तिरहुत के युवाओं और जरूरतमंदों के लिए जारी किया विजन

लाइव सिटीज, मुजफ्फरपुर: तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए समर्थित प्रत्याशी और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा ने विधान पार्षद बनने की स्थिति में अपने वेतन को लेकर बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि एमएलसी निर्वाचित होने पर वे अपने वेतन का एक भी रुपया निजी उपयोग में नहीं लेंगे। वेतन से मिलने वाली पूरी शुद्ध राशि तिरहुत क्षेत्र के युवाओं, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता के लिए समर्पित करेंगे। उन्होंने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपना ‘तिरहुत विजन 2026’ जारी किया और क्षेत्र के विकास, रोजगार, उच्च शिक्षा, शिक्षक हित तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं।

अभिषेक झा ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व उनके लिए निजी लाभ हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधान पार्षद के रूप में मिलने वाले वेतन का इस्तेमाल वे अपने निजी उपभोग के लिए नहीं करेंगे। इसके बजाय इस राशि को जनहित से जुड़े कार्यों में लगाने का प्रयास करेंगे।

उनके दृष्टिपत्र में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, गरीब मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में मदद देने, संकट से जूझ रहे परिवारों को आर्थिक सहयोग पहुंचाने और शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए पहल करने जैसी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू कराने, पेशेवर वर्गों की सामाजिक सुरक्षा और जनसमस्याओं के समाधान के लिए जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया है।

वेतन की राशि से होंगे तीन प्रमुख जनहितकारी काम

अभिषेक झा ने अपने शुद्ध वेतन को तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए समर्पित करने की बात कही है। इनमें तिरहुत क्षेत्र में हर साल रोजगार मेले के आयोजन में आर्थिक सहयोग, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता और दुर्घटना या गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद देना शामिल है।

उनका मानना है कि रोजगार मेले के माध्यम से युवाओं को विभिन्न कंपनियों, संस्थानों और नियोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। वहीं, आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सहायता देकर उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की जा सकती है।

उन्होंने जरूरतमंद परिवारों को आपात परिस्थितियों में आर्थिक सहयोग देने की भी प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, यह संकल्प उनके व्यक्तिगत वेतन के उपयोग से संबंधित है, न कि किसी सरकारी निधि से। इसके क्रियान्वयन में लागू कानूनी और वैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा।

शिक्षकों के सातवें वेतनमान और पुरानी पेंशन का मुद्दा उठाएंगे

‘तिरहुत विजन 2026’ में शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुख स्थान दिया गया है। अभिषेक झा ने सातवें वेतनमान, वेतन विसंगतियों, बकाया भुगतान, प्रोन्नति, पुरानी पेंशन और कैशलेस चिकित्सा सुविधा जैसे मुद्दों के समाधान के लिए पहल करने का संकल्प लिया है।

उन्होंने 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त उर्दू-बंगला, सामान्य कोटि और अनुकम्पा के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा से जुड़े मामलों के स्थायी समाधान के लिए भी प्रयास करने की बात कही है।

इसके अलावा शिक्षिकाओं को कार्यस्थल पर होने वाली परेशानियों, उत्पीड़न और अवकाश से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इसके लिए विशेष सहायता प्रकोष्ठ विकसित करने की योजना प्रस्तावित है। इस व्यवस्था के तहत आकस्मिक अवकाश (CL), बीमारी के अवकाश (SL), चाइल्ड केयर लीव (CCL) और मातृत्व अवकाश से संबंधित कठिनाइयों को उठाने तथा उनके समाधान के लिए पहल की जाएगी।

BRABU में AI और डेटा एनालिटिक्स जैसे पाठ्यक्रम शुरू कराने की पहल

उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ना भी अभिषेक झा के विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, एनीमेशन, ग्राफिक डिजाइन और वीडियो एडिटिंग जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू कराने के लिए पहल करने की बात कही है।

इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती तकनीक और रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। इससे स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं को पारंपरिक विषयों के साथ-साथ नई तकनीकों और डिजिटल क्षेत्र में भी अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने तिरहुत के चारों जिलों में उच्च शिक्षा, स्नातकोत्तर अध्ययन और शोध सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया है। इसके साथ ही क्षेत्र में बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज (BNYS) पाठ्यक्रम शुरू कराने की संभावनाओं पर काम करने का प्रस्ताव रखा है।

24 घंटे में डिजिटल डिग्री, एक सप्ताह में हार्डकॉपी देने का प्रस्ताव

अभिषेक झा ने विश्वविद्यालयों में डिग्री वितरण की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके विजन में डिजिटल डिग्री 24 घंटे के भीतर और हार्डकॉपी एक सप्ताह में उपलब्ध कराने की प्रस्तावित व्यवस्था शामिल है।

इसका उद्देश्य डिग्री प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को बार-बार विश्वविद्यालय और कॉलेजों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है। समय पर डिग्री मिलने से उच्च शिक्षा, नौकरी और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में विद्यार्थियों को होने वाली परेशानी कम हो सकती है।

यह व्यवस्था लागू कराने के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों और विभागों के स्तर पर पहल करने की बात कही गई है। इसे फिलहाल उनके विजन में शामिल प्रस्ताव के रूप में देखा जाना चाहिए।

हर साल रोजगार मेला, कौशल विकास केंद्रों का विस्तार

युवाओं के रोजगार और कौशल विकास को लेकर भी अभिषेक झा ने कई प्रतिबद्धताएं जाहिर की हैं। उन्होंने तिरहुत में प्रतिवर्ष रोजगार मेला आयोजित कराने में सहयोग देने, कौशल विकास केंद्रों का विस्तार करने और एकीकृत रोजगार सूचना केंद्र विकसित करने का संकल्प लिया है।

एकीकृत रोजगार सूचना केंद्र के माध्यम से युवाओं को नौकरी, प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है। इसके साथ ही महिला स्नातकों के लिए करियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

अभिषेक झा ने पात्र स्नातकों के लिए बेरोजगारी सहायता से संबंधित नीति प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखने की बात कही है। इसका अर्थ है कि इस विषय पर नीतिगत पहल की जाएगी; इसे किसी मौजूदा या स्वीकृत बेरोजगारी भत्ता योजना की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।

अतिथि शिक्षकों और संविदाकर्मियों के अधिकारों पर भी जोर

‘तिरहुत विजन 2026’ में केवल नियमित शिक्षकों की समस्याओं को ही नहीं, बल्कि अतिथि शिक्षकों, संविदाकर्मियों, वित्तरहित शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालय-महाविद्यालय के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है।

अभिषेक झा ने इन वर्गों के अधिकारों और समस्याओं को संबंधित मंचों पर उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न वर्गों की सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान और उनके हितों की रक्षा भी क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है।

इसके साथ ही अधिवक्ताओं, चिकित्सकों और पत्रकारों की पेशागत जरूरतों तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी विजन में जगह दी गई है। इन वर्गों की समस्याओं को संबंधित विभागों और सरकार के सामने रखने के लिए पहल करने की बात कही गई है।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और छात्राओं की प्रोत्साहन योजनाओं पर ध्यान

विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली योजनाओं से जुड़ी परेशानियों के समाधान को भी प्राथमिकता में रखा गया है। अभिषेक झा ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना और स्नातक छात्राओं की प्रोत्साहन योजनाओं से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सहायता व्यवस्था विकसित करने की बात कही है।

इन योजनाओं का लाभ लेने में पात्र विद्यार्थियों को दस्तावेज, आवेदन, भुगतान या अन्य प्रक्रियाओं से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। प्रस्तावित सहायता व्यवस्था के जरिए ऐसी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए फॉलोअप करने की पहल की जाएगी।

पहले 100 दिनों में चार जिलों की समस्याओं की सूची बनाने का संकल्प

अभिषेक झा ने निर्वाचित होने की स्थिति में पहले 100 दिनों के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने की बात कही है। इसके तहत मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर की प्रमुख समस्याओं को संकलित किया जाएगा।

प्रस्तावित कार्ययोजना में संबंधित वर्गों के साथ संवाद, लंबित मामलों की प्राथमिकता सूची तैयार करना और विभागीय स्तर पर फॉलोअप की व्यवस्था विकसित करना शामिल है। इसका उद्देश्य क्षेत्र की समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल समस्याएं उठाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित विभागों से जवाब प्राप्त करने और मामलों की प्रगति पर नजर रखने की व्यवस्था भी जरूरी है।

हर साल जारी करेंगे अपने कामकाज की सार्वजनिक रिपोर्ट

पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अभिषेक झा ने वार्षिक सार्वजनिक कार्य-रिपोर्ट जारी करने का संकल्प लिया है। इसमें विधान परिषद में उठाए गए प्रश्नों, विभागों को भेजे गए पत्रों, प्राप्त जवाबों और समस्याओं के समाधान की प्रगति का विवरण देने की बात कही गई है।

इस पहल का उद्देश्य मतदाताओं और आम लोगों को यह जानकारी उपलब्ध कराना है कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर क्या प्रयास किए गए और उन पर कितना काम आगे बढ़ा। इस तरह लोग उनके कामकाज का मूल्यांकन केवल चुनावी वादों के आधार पर नहीं, बल्कि दर्ज प्रयासों और उपलब्ध परिणामों के आधार पर कर सकेंगे।

‘तिरहुत विजन 2026’ को अंतिम दस्तावेज नहीं मानते अभिषेक झा

अभिषेक झा ने स्पष्ट किया कि ‘तिरहुत विजन 2026’ कोई अंतिम दस्तावेज नहीं है। तिरहुत के स्नातकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, युवाओं और अन्य संबंधित वर्गों से मिलने वाले नए सुझावों और समस्याओं को इसमें लगातार शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

उनके विजन का मुख्य फोकस शिक्षित तिरहुत, सक्षम युवा, सुरक्षित शिक्षक और समृद्ध समाज के निर्माण पर है। रोजगार, उच्च शिक्षा, शिक्षक हित, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े प्रस्तावों के जरिए उन्होंने क्षेत्र के मतदाताओं के सामने अपनी प्राथमिकताएं रखी हैं।

अब इन प्रतिबद्धताओं की वास्तविक परीक्षा इनके क्रियान्वयन, संबंधित विभागों के साथ समन्वय और क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए किए जाने वाले प्रयासों से होगी। अभिषेक झा ने भी अपने काम का मूल्यांकन वादों के बजाय प्रयासों, पारदर्शिता और वास्तविक परिणामों के आधार पर किए जाने की बात कही है।

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