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नितिन नबीन ने विनय बिहारी की लगाई फटकार, कहा..सम्राट चौधरी सरकार के खिलाफ बोले तो खैर नहीं!

लाइव सिटीज, पटना: बिहार बीजेपी में लौरिया विधायक विनय बिहारी के अपनी ही सरकार के खिलाफ लगातार मुखर होने का मामला अब पार्टी संगठन तक पहुंच गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विनय बिहारी को तलब कर उनके हालिया बयानों और गतिविधियों पर नाराजगी जताई। पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें सार्वजनिक मंचों पर सरकार और संगठन के खिलाफ बयान देने से बचने की स्पष्ट नसीहत दी गई है।

सरकार के खिलाफ धरने से नाराजगी

दरअसल, 29 सितंबर को लौरिया विधायक विनय बिहारी पश्चिम चंपारण समाहरणालय परिसर में बाढ़ राहत की स्थिति को लेकर धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने कहा था कि जब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा नहीं लेते, तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। विधायक ने राहत सामग्री, नाव, सामुदायिक रसोई, पशुचारा और मुआवजे से जुड़ी कई मांगें उठाई थीं।

इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया था। विनय बिहारी ने बाद में कहा था कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

नितिन नवीन ने विनय बिहारी से क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नितिन नवीन ने विधायक को समझाया कि पार्टी और सरकार से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर इस तरह उठाने से संगठन की छवि प्रभावित होती है। उन्हें आगे से पार्टी लाइन से अलग सार्वजनिक बयानबाजी और अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाले कदमों से बचने को कहा गया है।

कर्ज और सरकारी नीतियों पर भी उठा चुके हैं सवाल

विनय बिहारी का सरकार से मतभेद सिर्फ बाढ़ राहत तक सीमित नहीं रहा है। वह पहले भी सरकार की कुछ नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने सरकारी खजाने, कर्ज लेकर विकास करने और चुनावी योजनाओं में खर्च जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी थी।

उन्होंने यह तर्क भी दिया था कि अगर उन्हें सरकार या व्यवस्था में कुछ गलत दिखाई देता है तो उस पर बोलना उनका अधिकार है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ऐसे मतभेदों को संगठन के अंदर उठाया जाना चाहिए, सार्वजनिक मंच पर नहीं।

शराबबंदी पर भी सरकार को घेर चुके हैं

विनय बिहारी पहले बिहार की शराबबंदी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रतिबंध के बावजूद शराब मिलने की शिकायतों का हवाला देते हुए कानून के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए थे। इस तरह अलग-अलग मुद्दों पर उनके बयानों से पार्टी नेतृत्व पहले से असहज था।

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