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बाढ़ पीड़ितों के खाते में आएंगे 7 हजार रुपये, इस दिन CM सम्राट चौधरी भेजेंगे पैसा

लाइव सिटीज, पटना: बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को पश्चिम चंपारण पहुंचे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया और इसके बाद बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में चल रहे बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर उनकी परेशानियां और जरूरतें जानीं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री ने पश्चिम चंपारण के बगहा, बैरिया के बथना, योगापट्टी के मच्छरगांवा तथा नौतन के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके अलावा सारण जिले के मकेर प्रखंड के हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे तटबंध का भी हवाई निरीक्षण किया गया। पटना से पश्चिम चंपारण आने के दौरान भी मुख्यमंत्री ने रास्ते में नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया।

राहत शिविर में खुद लोगों को परोसा खाना

हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री बथना स्थित बाढ़ राहत शिविर पहुंचे। यहां उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड और महिलाओं एवं पुरुषों के ठहरने की व्यवस्था का निरीक्षण किया। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने सामुदायिक रसोई में खुद बाढ़ प्रभावित लोगों को खाना परोसा।

मुख्यमंत्री ने शिविर में रह रहे लोगों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली और अधिकारियों को जरूरत के मुताबिक तत्काल राहत उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित लोगों की समस्याओं को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन तक पहुंचाकर उनका जल्द समाधान कराया जाए।

दशहरा से पहले हर प्रभावित परिवार को 7 हजार रुपये

बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए मुख्यमंत्री ने आर्थिक सहायता को लेकर भी बड़ा निर्देश दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की पहचान कर दशहरा से पहले प्रत्येक परिवार को 7,000 रुपये की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि इससे पहले 15 सितंबर को 8,27,472 बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 7,000 रुपये प्रति परिवार की दर से कुल 579.23 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि भेजने की शुरुआत की जा चुकी है।

सामुदायिक रसोई तब तक चलाने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई पर्याप्त संख्या में चलती रहनी चाहिए। जब तक बाढ़ प्रभावित लोग अपने घरों में वापस नहीं लौट जाते और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई संचालित करने का निर्देश दिया गया है।

इसके साथ ही प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन और अन्य जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने को कहा गया है। बाढ़ के कारण पशुधन प्रभावित होने को देखते हुए पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और आश्रय की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया।

नदियों और तटबंधों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश

बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बाढ़ राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने मानचित्र के जरिए मुख्यमंत्री को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, नदियों के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति, राहत एवं चिकित्सा शिविरों और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने पानी की निकासी के लिए आवश्यकता के अनुसार स्लुइस गेट खोलने, नदियों के जलस्तर, तटबंध और कटाव पर लगातार नजर रखने तथा पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था रखने का निर्देश दिया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती जारी रखते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाने को कहा गया।

नेपाल से पानी आने के कारण बिगड़ी स्थिति

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण बिहार के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई है। मुख्यमंत्री ने कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराने की बात कही, ताकि बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन किया जा सके और स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा सके।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने तथा प्रभावित लोगों को निर्धारित मानकों के अनुसार सभी जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। सरकार की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित परिवारों तक भोजन, राशन, चिकित्सा, पेयजल, आवास और आर्थिक सहायता पहुंचाना है।

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