लाइव सिटीज, पटना: नेपाल में लगातार बारिश के बाद गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी ने बिहार में एक बार फिर बाढ़ की आशंका बढ़ा दी है। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को गोपालगंज और पूर्वी चंपारण के बाढ़ प्रभावित एवं संभावित प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद उन्होंने डुमरियाघाट पहुंचकर गंडक नदी और आसपास की स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत और बचाव से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए।
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने गंडक नदी में बढ़े जलस्तर को लेकर कहा कि नेपाल के गंडक जलग्रहण क्षेत्र में पिछले दो दिनों में हुई भारी बारिश के कारण नदी में अप्रत्याशित रूप से पानी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस बार बाढ़ का पैटर्न भी बदला है। पहले गंगा में बाढ़ की स्थिति बनी और अब गंडक में चुनौती बढ़ी है।
उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने गंडक की स्थिति को लेकर कहा कि नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई थी। इसी वजह से वाल्मीकिनगर बराज पर पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ा। उन्होंने बताया कि नेपाल के देवघाट गेज पर दर्ज जलस्तर को देखते हुए बराज पर करीब पांच लाख क्यूसेक या उससे अधिक पानी आने की संभावना थी।
विजय चौधरी के मुताबिक यह प्रवाह वर्ष 2024 में दर्ज 5.62 लाख क्यूसेक के अधिकतम जलश्राव से कम रहने की संभावना थी। इसके बावजूद जल संसाधन विभाग ने निगरानी और चौकसी बढ़ा दी थी। उन्होंने गंडक के दोनों तटबंधों पर अतिरिक्त अभियंताओं की तैनाती और अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने की जानकारी दी।
जल संसाधन मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि तटबंधों की निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में बरती जाने वाली शिथिलता को गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
वहीं उन्होंने यह भी बताया कि उस समय गंगा का जलस्तर अपेक्षाकृत कम था। इससे गंडक के पानी की गंगा में निकासी सुचारू रहने की स्थिति बनी हुई थी। विभागीय आकलन के अनुसार इससे व्यापक जलजमाव या गंभीर बाढ़ का तत्काल खतरा कम था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों का शत-प्रतिशत पूर्वानुमान संभव नहीं है।
