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नंदा अष्टमी पर नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप पहुंचीं सहरसा की लक्ष्मी झा, 15,500 फीट की ऊंचाई पर फहराया तिरंगा

लाइव सिटीज, सहरसा: बिहार के सहरसा की पर्वतारोही लक्ष्मी झा ने हिमालय में एक और साहसिक उपलब्धि अपने नाम की है। पूर्व में माउंट एवरेस्ट बेस कैंप और माउंट किलिमंजारो तक पहुंच चुकीं लक्ष्मी झा ने 19 सितंबर 2026 को नंदा अष्टमी के अवसर पर नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप पहुंचकर भारतीय तिरंगा फहराया। करीब 15,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित बेस कैंप तक पहुंचने के दौरान उन्हें खराब मौसम, लगातार बारिश, घने बादल और कठिन चढ़ाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

इस अभियान की खास बात यह रही कि लक्ष्मी झा के साथ जापान के चिबा प्रांत के 75 वर्षीय युइची तमुरा भी अभियान दल का हिस्सा रहे। इतनी अधिक उम्र के बावजूद तमुरा ने कठिन पहाड़ी रास्ते पर लक्ष्मी झा के साथ कदम मिलाया और अभियान को पूरा किया।

गंघर गांव से शुरू हुई कठिन यात्रा

नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप से लगभग आठ किलोमीटर नीचे गंघर गांव में अभियान के लिए बेस कैंपिंग स्टेशन बनाया गया था। यहीं से लक्ष्मी झा और उनके साथियों ने बेस कैंप की ओर चढ़ाई शुरू की। रास्ता बेहद कठिन और ऊंचाई वाला था। मौसम भी लगातार चुनौती पेश कर रहा था।

अभियान के शुरुआती दो दिनों में मूसलाधार बारिश के कारण रास्ते में काफी परेशानी हुई। टीम बेस कैंप तक पहुंची, लेकिन घने बादलों और धुंध की वजह से नंदा देवी की ऊंची चोटियों के दर्शन नहीं हो सके। लगातार करीब आठ-आठ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करने के बाद भी जब मौसम ने साथ नहीं दिया तो टीम को नीचे लौटना पड़ा।

दो बार लौटना पड़ा, लेकिन हौसला नहीं टूटा

लगातार दो दिनों तक कठिन चढ़ाई करने और मौसम के कारण नंदा देवी की चोटी नहीं देख पाने के बावजूद लक्ष्मी झा ने अभियान अधूरा छोड़ने का फैसला नहीं किया। उन्होंने तीसरे दिन एक बार फिर बेस कैंप की ओर जाने का निर्णय लिया।

19 सितंबर को नंदा अष्टमी के दिन मौसम ने भी साथ दिया। बारिश और धुंध के बीच छिपी रहने वाली नंदा देवी की चोटियां इस बार साफ दिखाई देने लगीं। लक्ष्मी झा के लिए यह क्षण धार्मिक आस्था और पर्वतारोहण, दोनों दृष्टि से बेहद खास रहा।

नंदा अष्टमी पर पूजा-अर्चना के बाद फहराया तिरंगा

बेस कैंप पहुंचने के बाद लक्ष्मी झा ने नंदा देवी की चोटी के सामने पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने वहां भारतीय तिरंगा फहराया। नंदा अष्टमी के दिन 15,500 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फहराना उनके अभियान का सबसे यादगार पल रहा।

इस दौरान उनके साथ मौजूद 75 वर्षीय जापानी नागरिक युइची तमुरा भी इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित नजर आए। बताया गया कि उन्होंने लक्ष्मी झा के साहस और दृढ़ता की सराहना करते हुए भारतीय महिला शक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

पहले भी हासिल कर चुकी हैं कई उपलब्धियां

लक्ष्मी झा इससे पहले माउंट एवरेस्ट बेस कैंप और अफ्रीका की प्रसिद्ध पर्वत चोटी माउंट किलिमंजारो तक पहुंचकर अपनी पर्वतारोहण क्षमता का परिचय दे चुकी हैं। नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप का यह अभियान उनके साहसिक सफर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।

उनकी इस उपलब्धि से सहरसा सहित पूरे बिहार के खेल और साहसिक गतिविधियों से जुड़े लोगों में उत्साह है। स्थानीय स्तर पर भी उनकी सफलता को बिहार की बेटी की उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

75 वर्षीय जापानी पर्वतारोही की मौजूदगी बनी अभियान की खासियत

इस अभियान में युइची तमुरा की भागीदारी भी विशेष चर्चा का विषय रही। 75 वर्ष की उम्र में कठिन हिमालयी क्षेत्र तक पहुंचना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। लक्ष्मी झा के साथ उन्होंने अभियान में हिस्सा लिया और खराब मौसम के बावजूद उनका साथ दिया।

लक्ष्मी झा के इस अभियान ने यह भी दिखाया कि पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता का नहीं, बल्कि धैर्य, आत्मविश्वास और लगातार प्रयास का भी खेल है। दो दिनों तक मौसम के कारण लौटना पड़ा, लेकिन उन्होंने तीसरे दिन दोबारा प्रयास किया और आखिरकार नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर तिरंगा फहराने में सफलता हासिल की।

सहरसा की बेटी की इस उपलब्धि से जिले के लोगों में खुशी का माहौल है। उनके अभियान ने बिहार की पर्वतारोहण और साहसिक खेलों की दुनिया में भी एक नई उपलब्धि दर्ज की है।

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