लाइव सिटीज, पटना: पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी नेताओं ने जमुई में छात्रा के साथ हुई घटना को लेकर बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। नेताओं ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही बिहार में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि जमुई की घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। आरोप लगाया गया कि प्रदेश में महिलाएं और बच्चियां घर, सड़क, स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
सम्राट चौधरी के पुराने बयान का हवाला
वक्ताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयान का उल्लेख करते हुए उनसे जवाब मांगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि उस समय सम्राट चौधरी ने मुंगेर में कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा था कि यदि किसी को हाथ लगाया गया तो वह इस्तीफा देने को तैयार हैं।
विपक्ष ने इसी बयान को आधार बनाते हुए सवाल किया कि यदि सरकार के स्तर पर बिहार में कानून-व्यवस्था नियंत्रित है तो महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ लगातार सामने आ रही घटनाओं पर जवाबदेही कौन लेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सम्राट चौधरी से इस्तीफे की मांग भी की गई।
जदयू नेताओं के बयानों पर भी निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं के उन कथित बयानों का भी जिक्र किया गया, जिनमें जमुई की घटना को ‘छिटपुट घटना’ या व्यक्तिगत घटना बताया गया था। वक्ताओं ने जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, मंत्री श्रवण कुमार और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयानों का उल्लेख करते हुए सरकार पर संवेदनशीलता के साथ मामले को नहीं देखने का आरोप लगाया।
महिला मंत्री के कथित ‘मॉरल पुलिसिंग’ संबंधी बयान को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी पीड़ित बच्ची या महिला के साथ हुई घटना को उसके व्यवहार या पहनावे से जोड़ना उचित नहीं है।
एक महीने की घटनाओं का हवाला देकर सरकार से पूछे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने पिछले एक महीने के दौरान बिहार के अलग-अलग जिलों में महिलाओं और बच्चियों से जुड़ी आपराधिक घटनाओं की खबरों का हवाला दिया। इनमें नाबालिग छात्राओं से दुष्कर्म, अपहरण के प्रयास, हत्या, शिक्षकों पर छात्राओं के साथ आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप और बच्चियों के साथ अपराध से जुड़े मामले शामिल बताए गए।
वक्ताओं ने कहा कि ये मामले किसी एक जिले तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन घटनाओं में पुलिस की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई और आरोपियों के खिलाफ मामलों का वर्तमान स्थिति क्या है।
सासाराम जेल में मौत का मामला भी उठाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सासाराम स्थित मंडल कारा में एक बंदी की मौत का मामला भी उठाया गया। आरोप लगाया गया कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है और जेल में उनके साथ गंभीर ज्यादती की जा रही है।
वक्ताओं ने दावा किया कि शराब से जुड़े एक मामले में गिरफ्तारी के बाद एक व्यक्ति से कथित तौर पर पैसे की मांग की गई और बाद में जेल में उसकी मौत हो गई। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
पुलिस हिरासत में मौत का भी जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस हिरासत में मौत के एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अलग-अलग जिलों में पुलिस कार्रवाई और हिरासत से जुड़े मामलों में भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने के बजाय पुलिस और जेल प्रशासन से जुड़े आरोपों पर भी जवाब देना चाहिए।
विपक्ष ने कहा कि जमुई की घटना को केवल एक अलग मामला मानकर छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई तथा कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
